प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आते ही क्यों जरूरी है डॉक्टर से मिलना? अर्ली चेकअप से टल सकता है बड़े ऑपरेशन का खतरा
बच्चे के हार्ट और ब्रेन के विकास के लिए शुरुआती दिन सबसे महत्वपूर्ण, रि-लाइफ केयर हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. वनीता ने दी अहम सलाह
वाराणसी (भदैनी मिरर): मां बनना हर महिला के जीवन का सबसे सुखद अहसास होता है, लेकिन इस सुखद अहसास को सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। वाराणसी के रि-लाइफ केयर हॉस्पिटल की निदेशक और प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) डॉ. वनीता ने महिलाओं को सलाह दी है कि जैसे ही प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आए, बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


डॉक्टर वनीता के अनुसार, पीरियड डिले होने के 7 दिनों के भीतर टेस्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर से मिलना न केवल मां बल्कि बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी निर्णायक होता है।
बच्चे के महत्वपूर्ण अंगों का होता है निर्माण
डॉ. वनीता बताती हैं कि प्रेगनेंसी का शुरुआती समय वह दौर होता है जब बच्चा मां के शरीर से जुड़ रहा होता है। इसी दौरान बच्चे के सबसे महत्वपूर्ण अंगों जैसे हार्ट (दिल) और ब्रेन (दिमाग) का विकास शुरू होता है।

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पोषक तत्वों की कमी: यदि इस समय मां के शरीर में किसी भी आवश्यक तत्व की कमी होती है, तो इसका सीधा असर बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ सकता है।
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समय पर जांच: डॉक्टर द्वारा बताई गई शुरुआती जांचों और सप्लीमेंट्स के जरिए बच्चे को भविष्य में होने वाले दुष्परिणामों से बचाया जा सकता है।
एक्टोपिक प्रेगनेंसी: खतरे की पहचान और समाधान
जल्द डॉक्टर के पास जाने का एक सबसे बड़ा तकनीकी कारण प्रेगनेंसी की सही जगह का पता लगाना है। डॉ. वनीता ने बताया कि कई बार गर्भ बच्चादानी में न ठहरकर उसके बाहर ठहर जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में 'एक्टोपिक प्रेगनेंसी' कहा जाता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज:

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पीरियड मिस होने के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आना।
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पेट के निचले हिस्से में दर्द होना।
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हल्की-फुल्की स्पॉटिंग (खून के धब्बे) दिखना।
यदि ये लक्षण दिख रहे हैं, तो यह संकेत है कि प्रेगनेंसी सही जगह पर नहीं है। डॉक्टर समय रहते अल्ट्रासाउंड के जरिए इसका पता लगा सकते हैं। समय पर पहचान होने से मेडिकल मैनेजमेंट (दवाओं) के जरिए इलाज संभव है और पेशेंट एक बड़े और जटिल ऑपरेशन से बच सकता है।
