Udta Teer Movie Review: आयुष्मान खुराना की स्पाय-कॉमेडी 'उड़ता तीर' का रिव्यू
याददाश्त खोने के बाद खुद को ही ढूंढने निकलता है पाकिस्तानी जासूस; आयुष्मान खुराना की एक्टिंग ने संभाली फिल्म की कमान
मनोरंजन डेस्क (भदैनी मिरर): आकाश ए कौशिक के निर्देशन में बनी और धर्मा प्रोडक्शंस व सिख्या एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित 'उड़ता तीर' (Udta Teer) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। आयुष्मान खुराना और सारा अली खान स्टारर यह फिल्म हॉलीवुड की प्रसिद्ध 'ऑस्टिन पावर्स' और मेल ब्रूक्स की फिल्मों की तर्ज पर बनाई गई एक जासूसी पैरोडी (Spy Spoof/Comedy) है। गंभीर एक्शन-थ्रिलर दौर के बीच यह फिल्म जासूसी दुनिया के हल्के-फुल्के और मजेदार पहलू को सामने लाने का प्रयास करती है।

क्या है 'उड़ता तीर' की कहानी?
फिल्म की कहानी 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत में तबाही मचाने भेजे गए एक पाकिस्तानी आईएसआई (ISI) जासूस बिलाल अहमद उर्फ विक्रांत थापर (आयुष्मान खुराना) के इर्द-गिर्द घूमती है। एक गंभीर हादसे में सिर पर चोट लगने के कारण बिलाल अपनी याददाश्त गंवा बैठता है।
याददाश्त खोने के बाद वह खुद को भारतीय काउंटर-टेररिज्म एजेंट समझ बैठता है और अपने असली मिशन को भूलकर 'खुद' की ही तलाश में जुट जाता है। उसकी इस अजीब हरकत से रावलपिंडी में बैठे उसके आका जनरल मीर (गुलशन ग्रोवर) और नियाजी (राम कपूर) के पसीने छूट जाते हैं, वहीं भारत में उसकी पत्नी यामिनी (सारा अली खान) जो रक्षा मंत्रालय में कार्यरत है, इस गफलत से बेखबर रहती है।
अभिनय और निर्देशन की कसौटी
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आयुष्मान खुराना: लीक से हटकर किरदार निभाने के लिए पहचाने जाने वाले आयुष्मान खुराना ने एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता साबित की है। एक ऐसे जासूस का किरदार, जो कल्पना और हकीकत के बीच फंसा है, आयुष्मान ने अपनी कॉमिक टाइमिंग और सहजता से संभाला है।
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मुकुल देव का यादगार काम: फिल्म में स्वर्गीय मुकुल देव अपनी आखिरी स्क्रीन अपीयरेंस में एक भटके हुए आतंकी के रूप में काफी प्रभावित करते हैं।
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सह-कलाकार: राम कपूर, गुलशन ग्रोवर, सुहैल नैयर, स्मिता तांबे और राहुल बोस ने अपने सीमित किरदारों में बेहतर काम किया है। हालांकि, सारा अली खान के किरदार को कहानी में सीमित दायरा ही मिल पाया है।
समीक्षा: कहां चूकी फिल्म?
हाउसफुल 4 और भूल भुलैया जैसी फिल्मों के लेखक रहे आकाश ए कौशिक ने बतौर निर्देशक अपनी पहली कोशिश की है। फिल्म में कुछ मजेदार और हंसाने वाले पल जरूर हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले और लेखन में निरंतरता की कमी खलती है। फिल्म का व्यंग्य कई जगहों पर अपनी धार खो देता है और कई जोक्स बेअसर साबित होते हैं।
निष्कर्ष: यदि आप आयुष्मान खुराना के अभिनय के प्रशंसक हैं और वीकेंड पर एक हल्की-फुल्की, गैर-गंभीर स्पाय-कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो 'उड़ता तीर' एक बार देखी जा सकती है।
