Toxic Movie Review: 'KGF' के बाद यश का धांसू कमबैक, लेकिन क्या रंग ला पाई एक्शन और ग्लैमर से भरपूर 'टॉक्सिक'?
गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक' सिनेमाघरों में रिलीज; नयनतारा, कियारा आडवाणी और हुमा कुरैशी के अभिनय की तारीफ, पढ़ें भदैनी मिरर का रिव्यू।
सिनेमा: साउथ सिनेमा के 'रॉकिंग स्टार' यश अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'केजीएफ: चैप्टर 2' की ऐतिहासिक सफलता के चार साल बाद बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी कर चुके हैं। गीतू मोहनदास के निर्देशन और भारी-भरकम बजट में बनी फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' (Toxic: A Fairytale for Grown-ups) सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। क्या यह फिल्म दर्शकों की कसौटी और 'KGF' के बनाए बेंचमार्क पर खरी उतरती है? आइए जानते हैं।


कहानी: 1940 के दशक का क्राइम और ड्रामा
फिल्म की कहानी मुख्य रूप से 1940 के दशक के गोवा की पृष्ठभूमि पर आधारित है। राया (यश) और उसकी बड़ी बहन गंगा (नयनतारा) अनाथ होने के बाद अपराध की दुनिया में अपने कदम जमाते हैं। दोनों भाई-बहन सल्वाडोर (डैरेल डी'सिल्वा) नाम के एक खूंखार माफिया के साथ अफीम के अवैध कारोबार से जुड़ते हैं। राया का जीवन बेहद जटिल, हिंसक और उसकी अतीत की छांव से घिरा हुआ है।

कहानी में मोड़ तब आता है जब राया का जीवन कई महिलाओं से प्रभावित होता है—चाहे वह उसकी बहन गंगा हो, उसकी पत्नी रेबेका (तारा सुतारिया), प्रेमिका नादिया (कियारा आडवाणी), मेलिसा (रुक्मिणी वसंत) या फिर उससे नफरत करने वाली सल्वाडोर की पार्टनर एलिजाबेथ (हुमा कुरैशी)। राया का किरदार अपनी बेबाक, आक्रामक और 'टॉक्सिक' मानसिकता के लिए जाना जाता है।


अभिनय: यश का स्वैग और फीमेल लीड्स का दबदबा
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यश: फिल्म में यश की स्क्रीन प्रेजेंस बेहद प्रभावी है। उन्होंने राया के साथ-साथ एक और भूमिका (डबल रोल) को सहजता और स्वैग के साथ निभाया है। उनका डायलॉग डिलीवरी और एक्शन सीन दर्शकों को बांधकर रखते हैं।
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फीमेल स्टार्स: 'टॉक्सिक' की सबसे बड़ी खासियत इसकी अभिनेत्रियां हैं। नयनतारा, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत—सभी ने अपने-अपने किरदारों को पूरी मजबूती के साथ निभाया है। गीतू मोहनदास ने सभी महिला पात्रों को कहानी आगे बढ़ाने का अहम जरिया बनाया है।
तकनीकी पक्ष और निर्देशन
फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट और प्रोडक्शन वैल्यू हॉलीवुड स्तर का लगता है। राजीव रवि की सिनेमैटोग्राफी और रवि बसरूर का बैकग्राउंड म्यूजिक (BGM) हर सीन के इम्पैक्ट को बढ़ा देता है। गीतू मोहनदास ने गैंगस्टर ड्रामा को एक नए और स्टाइलिश अंदाज में पेश करने की कोशिश की है।
कहां पिछड़ती है फिल्म?
फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी कहानी और स्क्रीनप्ले है। स्टाइल और विजुअल्स पर जितना ध्यान दिया गया है, उतना ध्यान प्लॉट की कसावट पर नहीं दिखता। फिल्म का रनटाइम (लगभग 194 मिनट) थोड़ा लंबा लगता है और कई एक्शन सीन्स खींचे हुए महसूस होते हैं। इसमें कई जगह 'KGF' की छाप दिखाई देती है, जिसके कारण यह पूरी तरह से एक नया अनुभव नहीं दे पाती।
रेटिंग: 3.5/5 स्टार
