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The Paradise Movie Review: नानी का 'मास अवतार' या उम्मीदों पर फिरा पानी? जानिए कैसी है 'द पैराडाइज'

श्रीकांत ओडेला के निर्देशन और नानी के अभिनय वाली 'द पैराडाइज' सिनेमाघरों में रिलीज; दमदार इंटरवल या कमजोर कहानी? जानिए भदैनी मिरर का रिव्यू।

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भदैनी मिरर एंटरटेनमेंट विशेष: नानी की 'द पैराडाइज' सिनेमाघरों में रिलीज — जबर्दस्त एक्शन और ट्रांसफॉर्मेशन के बावजूद मिली-जुली प्रतिक्रिया, जानिए कैसी है फिल्म

हाइलाइट्स:

  • स्टार कास्ट: नानी (जादल), मोहन बाबू, कायादु लोहार, सोनाली कुलकर्णी, राघव जुयाल

  • निर्देशक: श्रीकांत ओडेला ('दसरा' फेम)

  • संगीत: अनिरुद्ध रविचंदर

  • पृष्ठभूमि: 1980 के दशक की सिकंदराबाद की सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित

कहानी और बैकग्राउंड

'दसरा' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म देने के बाद निर्देशक श्रीकांत ओडेला और नानी की जोड़ी एक बार फिर फिल्म 'द पैराडाइज' के साथ बड़े पर्दे पर लौटी है। 1980 के दशक के सिकंदराबाद की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म 'जादल' (नानी द्वारा अभिनीत पात्र) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने समाज और समुदाय के अधिकारों व सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाता है।

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फिल्म की शुरुआत में भारतीय सिनेमा की महान हस्तियों के साथ-साथ तेलंगाना के क्रांतिकारी कवि गुम्माडी विट्ठल राव (गदर) को श्रद्धांजलि दी गई है, जो फिल्म को क्षेत्रीय इतिहास से जोड़ती है।

पब्लिक और X (ट्विटर) रिव्यू: 'प्योर हाई' या 'धीमी रफ्तार'?

24 सितंबर को रिलीज हुई इस फिल्म को लेकर दर्शकों और क्रिटिक्स से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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सकारात्मक पहलू (Positives):

  • नानी का अभिनय व एक्शन: नानी का फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन और एक्शन सीन्स में उनका इंटेंस अवतार दर्शकों को प्रभावित कर रहा है। 'जादल' के रूप में उनकी बॉडी लैंग्वेज की सराहना हो रही है।

  • इंटरवल ब्लॉक: फिल्म के शुरुआती 20 मिनट और इंटरवल सीन को दर्शकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है, जिसे कई फैंस 'प्योर हाई' बता रहे हैं।

  • माँ-बेटे का इमोशन: कुछ दर्शकों को फिल्म में दिखाया गया माँ-बेटे का भावुक रिश्ता पसंद आ रहा है।

नकारात्मक पहलू (Negatives):

  • कमजोर सेकेंड हाफ: अधिकतर समीक्षकों और दर्शकों का मानना है कि फिल्म का दूसरा हाफ अपनी पकड़ खो देता है और कहानी भटकती हुई नजर आती है।

  • लाउड BGM और एडिटिंग: अनिरुद्ध रविचंदर के बैकग्राउंड म्यूजिक और साउंड मिक्सिंग को लेकर भी दर्शकों ने निराशा जताई है। कुछ का कहना है कि अत्यधिक शोर और खराब एडिटिंग के कारण डायलॉग्स स्पष्ट नहीं सुनाई देते।

  • एग्जीक्यूशन और राइटिंग: कई दर्शकों के अनुसार, श्रीकांत ओडेला 'दसरा' जैसा जादू दोहराने में असफल रहे हैं और पटकथा बेहद धीमी व बोझिल लगती है।