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Smita Patil Birth Anniversary: मंत्री पिता की बेटी होने के बावजूद बेहद सादती से जीती थीं स्मिता पाटिल

दिग्गज अभिनेत्री स्मिता पाटिल की जयंती पर श्याम बेनेगल का संस्मरण; शबाना आजमी के साथ अनबन की खबरों की बताई सच्चाई

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मनोरंजन डेस्क (भदैनी मिरर): भारतीय सिनेमा की दिग्गज और नैसर्गिक अभिनय की मूरत रहीं अभिनेत्री स्मिता पाटिल की जयंती (17 अक्तूबर) के अवसर पर, उनके साथ कई बेहतरीन फिल्मों में काम करने वाले जाने-माने निर्देशक श्याम बेनेगल के संस्मरण एक बार फिर चर्चा में हैं। श्याम बेनेगल ने स्मिता पाटिल के शुरुआती दिनों, उनके सादगी भरे स्वभाव और अभिनय की अनूठी शैली से जुड़े कई संस्मरण साझा किए हैं।

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'खुद्द कैमरा करता था स्मिता से प्रेम'

श्याम बेनेगल बताते हैं कि स्मिता पाटिल की अभिनय कारकीर्द उनके ही निर्देशन में शुरू हुई थी। फिल्म संस्थान में रहते हुए उन्होंने एक शॉर्ट-फिल्म बनाई थी, जिसके बाद उन्होंने 'चरणदास चोर' में काम किया। बेनेगल के अनुसार, स्मिता का सबसे बड़ा गुण यह था कि कैमरा उनसे बेइंतहा प्यार करता था। वह कमाली की 'फोटोजेनिक' थीं और बहुत ही अलवार (सहज) तरीके से भावनाओं को पर्दे पर उतार देती थीं। शुरुआत में वह काफी लाजरीबुजरी और शांत स्वभाव की थीं, लेकिन धीरे-धीरे वह फिल्म यूनिट का अहम हिस्सा बन गईं।

शबाना आजमी के साथ कथित प्रतिस्पर्धा की सच्चाई

अक्सर यह चर्चा होती थी कि स्मिता पाटिल और शबाना आजमी के बीच कटुता या तीव्र प्रतिस्पर्धा थी, लेकिन श्याम बेनेगल ने इन खबरों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि दोनों ही कमाल की अभिनेत्रियां थीं। शबाना एक प्रशिक्षित (Trained) अभिनेत्री थीं, जबकि स्मिता पूरी तरह स्वाभाविक (Natural) थीं। फिल्म 'मंडी' और 'मंथन' के दौरान दोनों का काम और आपसी तालमेल बेहतरीन रहा। 'मंथन' की शूटिंग के दौरान स्मिता जमीन पर आम ग्रामीण लड़कियों की तरह बैठती थीं, जिससे शूटिंग देखने आने वाले लोग भी उन्हें आसानी से पहचान नहीं पाते थे कि वह फिल्म की मुख्य नायिका हैं।

मंत्री पिता की बेटी होने के बावजूद अद्भुत सादगी

स्मिता पाटिल के परिवार का जिक्र करते हुए बेनेगल ने बताया कि उनके पिता महाराष्ट्र में मंत्री थे और उनकी मां एक सामाजिक कार्यकर्ती थीं, लेकिन इसके बावजूद स्मिता के आचरण में कभी भी स्टारडम का घमंड नहीं झलका। उनके माता-पिता ने उन्हें बेहद साधारण माहौल में रखा, जिसका असर उनके हर एक बोलचाल और व्यवहार में झलकता था।

अल्प आयु में दुनिया से विदा हुईं स्मिता

स्मिता के करियर में फिल्म 'भूमिका' मील का पत्थर साबित हुई, जिसमें उन्होंने अलग-अलग उम्र के पड़ावों और गुंजाइश भरे किरदारों को बखूबी जिया। दुनियाभर में उनकी कला की सराहना हुई। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था और बच्चे को जन्म देने के दौरान आई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते वह बहुत कम उम्र में ही इस दुनिया को अलविदा कह गईं। श्याम बेनेगल मानते हैं कि यदि स्मिता कुछ वर्ष और जीवित रहतीं, तो भारतीय सिनेमा के खाते में कई और बेजोड़ masterpiece जुड़ जाते।