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90 के दशक के 'ओरिजिनल वाइब मास्टर' संगीतकार देवा का निधन

रजनीकांत के 'बाशा' से लेकर अजित कुमार के चार्टबस्टर गानों तक—तमिल सिनेमा को दिए कई यादगार संगीत एल्बम

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मनोरंजन डेस्क (भदैनी मिरर): तमिल सिनेमा में 1990 और 2000 के दशक में अपने संगीत से हर दिल पर राज करने वाले दिग्गज संगीतकार 'तेनिसई तेंद्रल' देवा (Deva) का निधन हो गया है। उनके निधन से तमिल सिनेमा और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। इंटरनेट की भाषा में जिन्हें आज 'वाइब मास्टर' (Vibe Master) कहा जाता है, देवा 90 के दशक के असली और पहले वाइब मास्टर थे। उनके संगीत ने उस दौर के तमिल समाज, संस्कृति और युवा वर्ग के मूड को बयां किया था।

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सुपरस्टार रजनीकांत के साथ यादगार सफर

देवा का संगीत सुपरस्टार रजनीकांत की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की पहचान बना। उन्होंने 'अन्नामलाई' (1992), 'बाशा' (1995) और 'अरुणाचलम' (1997) जैसी ऐतिहासिक फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। 'नान ऑटोकारन', 'स्टाइल स्टाइल थान', 'अथंडा इथंडा' और 'अल्ली अल्ली अनारकली' जैसे गानों ने थिएटर्स में तहलका मचा दिया था। फिल्म 'बाशा' का थीम सॉन्ग आज भी तमिल सिनेमा के मसाला म्यूजिक का पैमाना माना जाता है।

'गाना' संगीत के बेताज बादशाह

तमिल सिनेमा में स्थानीय लोक संगीत और शहरी धुनों के मिश्रण से बने 'गाना' (Gaana) म्यूजिक को घर-घर पहुँचाने में देवा का अमूल्य योगदान रहा। फिल्म सूर्यन (1992) का 'ला लक्कू डोल डप्पी मा', पोर्ककलम का 'अंजाम नंबर बसिले' और विष्णु का 'दोड्डाबेट्टा रोडू मेला' जैसे गानों ने हर वर्ग के श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। प्रभुदेवा के साथ उनकी जोड़ी ने 'तिरुपति एळुमलाई वेंकटेशा' और 'कासिमेडु' जैसे कालजयी पेप्पी ट्रैक्स दिए।

अजित कुमार के करियर को दी नई ऊँचाइयाँ

अजित कुमार को 90 के दशक में एक बड़ा स्टार बनाने में देवा के संगीत एल्बमों की बहुत बड़ी भूमिका रही। फिल्म 'आसई' (1995), 'काधल कोट्टई' (1996) और 'आनंद पूंगात्रे' (1999) के गानों ने अजित की लोकप्रियता को जन-जन तक पहुँचाया।

रोमांटिक धुनों के भी थे जादूगर

देवा न सिर्फ ऊर्जावान गानों के लिए जाने जाते थे, बल्कि रोमांटिक धुनों की रचना में भी उनका कोई सानी नहीं था। 'अप्रोच माथथिल' (वाली), 'काधला काधला' (अव्वई शनमुगी), 'मनम विरुम्बुथे' (नेरुक्कु नेर) और 'ओरु मणि अदितल' (कालमेल्लाम काधल वाळगा) जैसी धुनों ने लाखों दिलों को छुआ।

'तेनिसई तेंद्रल' देवा का जाना संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। 90 के दशक का उनका संगीत हमेशा उनके प्रशंसकों के दिलों में अमर रहेगा।