"मेरी जवानी या बेडरूम के सपने न देखें...कंगना रनौत का बाबा रामदेव पर तीखा पलटवार
'गटर जेनरेशन' वाले विवादित बयान पर रामदेव की टिप्पणी से भड़कीं बीजेपी सांसद; सुप्रीम कोर्ट की फटकार का याद दिलाया इतिहास
मुंबई (भदैनी मिरर न्यूज़): मंडी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत तथा प्रसिद्ध योग गुरु बाबा रामदेव के बीच शाब्दिक जंग तेज हो गई है। हाल ही में जेन-जी (Gen-Z) युवाओं को लेकर दिए गए कंगना के 'गटर जेनरेशन' वाले बयान पर बाबा रामदेव द्वारा साध निशाने पर अब एक्ट्रेस ने बेहद तल्ख लहजे में पलटवार किया है। कंगना ने सोशल मीडिया के जरिए बाबा रामदेव को करारी लताड़ लगाई है।


कंगना रनौत का इंस्टाग्राम पर तंज
बाबा रामदेव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, "बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में दिन में सपने मत देखो। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर अंदाजा लगा सकता है।"
योग गुरु पर कटाक्ष करते हुए सांसद कंगना ने आगे लिखा, "कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे और धोखाधड़ी वाले मेडिकल असर के दावों के लिए फटकार नहीं लगी, जो पक्के तथ्यों पर आधारित हैं, न कि किसी गॉसिप पर। इसलिए मुझे चरित्र (Character) का सबक मत दीजिए, आपसे तो बहुत ज्यादा बेहतर है मेरा कैरेक्टर।"

क्या कहा था बाबा रामदेव ने?
एक समाचार चैनल को दिए गए इंटरव्यू में बाबा रामदेव ने कंगना रनौत के जेन-जी वाले बयान पर नाराजगी जताई थी। रामदेव ने कहा था, "ऐसे किसी भी जेन-जी को गटर बोलना बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। यह गलत बात है और उनकी पार्टी को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।"


रामदेव ने आगे कहा था, "उनका (कंगना का) बचपन कैसा रहा, जवानी कैसी रही है और पहले के कारनामे कैसे रहे हैं, मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। अगर वह मेरे योग की प्रशंसा करती हैं, तो क्या मैं उनके गुनाहों पर लीपापोती कर दूंगा? युवा भारत की बड़ी ताकत हैं।"
क्या था 'गटर जेनरेशन' विवाद?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पोस्ट में कुछ प्रदर्शनकारियों और युवा महिलाओं को 'गटर जेनरेशन' कह दिया था। इस बयान के बाद विपक्ष और युवाओं के भारी विरोध का सामना करने पर कंगना ने बाद में सफाई जारी की थी। उन्होंने कहा था कि उनका बयान सभी जेन-जी युवाओं के लिए नहीं था, बल्कि केवल उन लोगों के लिए था जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक मर्यादा और भाषा की सीमा लांघी थी।
