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वाराणसी: पर्यावरण संरक्षण के लिए बीजीएम पब्लिक स्कूल की अनोखी पहल, 'एक पेड़ हर साल' लगाने की अपील

विश्व पर्यावरण दिवस पर डायरेक्टर पीएन सिंह ने चलाया वृक्षारोपण अभियान; बोले- 'विकास के लिए पेड़ कटना मजबूरी, तो नया पौधा लगाना हमारी जिम्मेदारी'

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वाराणसी: विश्व पर्यावरण दिवस के शुभ अवसर पर वाराणसी के बीजीएम पब्लिक स्कूल (BGM Public School) परिसर में पर्यावरण को सुरक्षित और हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से एक विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अभियान के जरिए स्कूल प्रशासन ने न सिर्फ परिसर में पौधे रोपे, बल्कि समाज को प्रकृति के प्रति जागरूक करने के लिए एक बेहद व्यावहारिक संदेश भी दिया।

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विकास भी जरूरी और पर्यावरण भी: डायरेक्टर पी. एन. सिंह

इस सराहनीय पहल की शुरुआत करते हुए स्कूल के मानद निदेशक (Honorable Director) पी. एन. सिंह ने पर्यावरण संतुलन पर गहरा जोर दिया। उन्होंने कहा, "आज के आधुनिक दौर में विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पेड़ों का काटा जाना एक मजबूरी बन चुका है, लेकिन यह पूरी तरह हमारे हाथ में है कि हम विकास के साथ-साथ अपनी प्रकृति का भी पूरा ख्याल रखें। नियम यह होना चाहिए कि जहां भी विकास कार्य के लिए एक पेड़ काटने की आवश्यकता पड़ती है, हमें उसके बदले कम से कम दो से तीन गुना नए पौधे अवश्य लगाने चाहिए।"

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बढ़ती गर्मी और मौसम चक्र को सुधारने का एकमात्र उपाय

स्कूल के एकेडमिक डायरेक्टर शशि प्रकाश सिंह ने भी इस मुहिम की सराहना करते हुए कहा कि वृक्षारोपण ही एकमात्र ऐसा जरिया है जिससे धरती पर हरियाली लौटाई जा सकती है। पेड़ लगाने से न सिर्फ समय पर बारिश का चक्र संतुलित रहता है, बल्कि लगातार बढ़ती जा रही भीषण गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्याओं से भी आने वाली पीढ़ी को बड़ी राहत मिल सकती है।

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'एक पेड़ हर साल' लगाने की खास अपील, जमीन न हो तो गमले में लगाएं

बीजीएम पब्लिक स्कूल प्रशासन ने इस मौके पर अपने सभी विद्यार्थियों और अभिभावकों से एक खास अपील की है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में 'एक पेड़ हर साल' लगाने का नियम बनाना चाहिए। स्कूल ने उन लोगों के लिए भी एक बेहतरीन सुझाव दिया जिनके पास जमीन की कमी है; उन्होंने कहा कि जगह उपलब्ध न होने पर लोग अपने घरों की छतों या बालकनी में गमलों के अंदर भी पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के इस महायज्ञ में अपना बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं। स्कूल का मानना है कि आज की हमारी ये छोटी-छोटी कोशिशें ही भविष्य में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लेकर आएंगी।