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बीएचयू आयुर्वेद संकाय में दाखिले का रास्ता साफ: NCISM ने दी हरी झंडी, 25 सितंबर से दूसरे राउंड की काउंसलिंग में मिलेगा मौका

सत्र 2026-27 के लिए यूजी की 75 और पीजी की 57 सीटों पर लगा मुहर; पहले राउंड से बाहर रहने के बाद छात्रों में एनसीआईएसएम की प्रक्रिया पर सवाल

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भदैनी मिरर (वाराणसी डेस्क): काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS) स्थित आयुर्वेद संकाय में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बीएएमएस (BAMS) और पीजी (PG) पाठ्यक्रमों में दाखिले का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने संकाय को सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया संचालित करने की औपचारिक अनुमति दे दी है।

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हालांकि, अनुमति पत्र देरी से जारी होने के कारण बीएचयू पहले राउंड की काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर हो गया है। अब अभ्यर्थियों को 25 सितंबर 2026 से शुरू हो रहे दूसरे राउंड की काउंसलिंग में बीएचयू का विकल्प चुनने और रजिस्ट्रेशन कराने का मौका मिलेगा।

यूजी की 75 और पीजी की 57 सीटों पर मिली मंजूरी

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एनसीआईएसएम के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड द्वारा जारी पत्र के अनुसार:

  • बीएएमएस (UG): कुल 60 मूल सीटों को मंजूरी मिली है, जो ईडब्ल्यूएस (EWS) कोटे को मिलाकर 75 सीटें होंगी।

  • स्नातकोत्तर (PG): 14 विभिन्न विषयों में 45 मूल सीटों की स्वीकृति मिली है, जो ईडब्ल्यूएस को मिलाकर 57 सीटें होंगी। पीजी में सर्वाधिक 12 सीटें शल्य तंत्र विभाग में स्वीकृत की गई हैं।

इन 14 पीजी विषयों में मिलेगा प्रवेश:

आयुर्वेद संहिता एवं सिद्धांत, रचना शारीर, क्रिया शारीर, द्रव्यगुण विज्ञान, रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना, रोग निदान एवं विकृति विज्ञान, स्वस्थवृत्त एवं योग, प्रसूति तंत्र एवं स्त्री रोग, कौमारभृत्य (बाल रोग), कायचिकित्सा, कायचिकित्सा-मनोविज्ञान, शल्य तंत्र, शालाक्य (नेत्र रोग) तथा शालाक्य (कर्ण, नासा एवं मुख रोग)।

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सुनवाई और हलफनामे के बाद जारी हुआ पत्र

बीएचयू प्रशासन के अनुसार, 22 और 23 मई को एनसीआईएसएम की टीम ने संकाय का निरीक्षण किया था। इसके बाद 21 अगस्त को हुई सुनवाई में आयुर्वेद संकाय के प्रमुख प्रो. के.एन. मूर्ति ने आयोग के सामने संस्थान का पक्ष रखा। बायोमेट्रिक उपस्थिति और आयोग के नियमों के पालन से संबंधित हलफनामा (Affidavit) देने के बाद 2 सितंबर को बोर्ड की 175वीं बैठक में अनुमति पर मुहर लगी और मंगलवार को औपचारिक पत्र जारी कर दिया गया।

DACP पर असमंजस और NCISM की प्रक्रिया पर उठे सवाल

  1. शिक्षकों के प्रमोशन पर पेंच: आयोग के नियमों को अक्षरशः मानने के संबंध में दिए गए हलफनामे के बाद अब आयुर्वेद संकाय में शिक्षकों की प्रोन्नति व्यवस्था (DACP) को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।

  2. छात्रों में नाराजगी: पहले राउंड की चॉइस फिलिंग 9 सितंबर को समाप्त हो रही थी, जबकि बीएचयू का नाम सूची में न होने से कई होनहार छात्र अन्य कॉलेजों का विकल्प चुनने को मजबूर हुए। छात्रों ने सवाल उठाया है कि एनसीआईएसएम को कॉलेजों की अंतिम स्वीकृति या अस्वीकृति की सूची जारी करने के बाद ही काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए थी।