SMS Varanasi में हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, आध्यात्मिकता और वैश्विक कल्याण पर मंथन
देश-विदेश से आए 300 से अधिक विद्वानों और शोधार्थियों की भागीदारी; उद्घाटन सत्र में Ajit Kumar Chaturvedi समेत कई शिक्षाविदों ने रखे विचार
वाराणसी स्थित School of Management Sciences Varanasi में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश और विदेश से आए विद्वानों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। सम्मेलन का मुख्य विषय आध्यात्मिकता, वैश्विक कल्याण और डिजिटल सजगता जैसे समकालीन मुद्दों पर केंद्रित रहा, जिस पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।


आध्यात्मिकता मानव जीवन का मूल आयाम: कुलपति
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए Ajit Kumar Chaturvedi, कुलपति Banaras Hindu University ने कहा कि आध्यात्मिकता किसी एक धर्म या परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन का मूलभूत आयाम है।
उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक संकटों के दौर में भारत ने संतुलित विकास का जो मार्ग प्रस्तुत किया है, वह पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक है।

युवाओं को अनुशासन और संतुलन अपनाने की सलाह
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक Vikram Singh ने युवाओं को जीवन में अनुशासन, संतुलन और आध्यात्मिक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि सफलता के लिए समय का सदुपयोग और लक्ष्य के प्रति समर्पण बेहद जरूरी है।
वैश्विक कल्याण पर गंभीर चर्चा की जरूरत
कार्यक्रम में मौजूद पूर्व कुलपति Giriraj Kishore Mishra (महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय) ने कहा कि आज की दुनिया तेजी से अस्थिर होती जा रही है। ऐसे समय में वैश्विक कल्याण, सतत विकास और डिजिटल सजगता जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा बेहद आवश्यक है।

उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति प्रेम, सह-अस्तित्व और संवेदनशीलता की भावना को बढ़ावा देती है।
वहीं Rajaram Shukla, पूर्व कुलपति Sampurnanand Sanskrit University ने भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की गहराई पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान और करुणा के निरंतर प्रवाह की संस्कृति है।
स्मारिका और पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए P. N. Jha, निदेशक School of Management Sciences Varanasi ने कहा कि संस्थान केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर भी सदैव प्रतिबद्ध रहा है।
इस अवसर पर सम्मेलन विषय पर आधारित स्मारिका का विमोचन किया गया तथा पिछले वर्ष आयोजित बारहवें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पर आधारित पुस्तक का भी अनावरण किया गया।
300 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत
सम्मेलन के पहले दिन कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देश-विदेश से आए लगभग 300 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए और विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया।
यह सम्मेलन शिक्षा, आध्यात्मिकता और वैश्विक कल्याण जैसे विषयों पर अकादमिक जगत के बीच संवाद और शोध को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
