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क्या ऑनलाइन चेकिंग (OSM) की वजह से खराब हुआ CBSE 12वीं का रिजल्ट? विवाद पर बोर्ड ने तोड़ी चुप्पी, दिया ये बड़ा बयान

7 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा पास प्रतिशत, JEE पास करने वाले छात्र भी हुए फेल; 19 मई से शुरू होगी पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया

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नई दिल्ली / एजुकेशन डेस्क। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित किए जाने के बाद से ही देश भर में अंकों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बाद अब सीबीएसई ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। बोर्ड ने इस साल लागू की गई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है।

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गौरतलब है कि इस साल सीबीएसई 12वीं का पास प्रतिशत गिरकर 85.2% पर आ गया है, जो पिछले 7 वर्षों में बोर्ड का सबसे खराब प्रदर्शन है।

क्यों खड़ा हुआ 12वीं के रिजल्ट पर विवाद?

नतीजे सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर हजारों छात्रों ने शिकायत की थी कि उन्हें फिजिक्स (भौतिकी), केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान), बायोलॉजी (जीव विज्ञान) और मैथ्स (गणित) जैसे मुख्य विषयों में उम्मीद से बेहद कम नंबर मिले हैं। विवाद तब और गहरा गया जब कई छात्रों ने दावा किया कि उन्होंने जेईई (JEE) जैसी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं तो पास कर लीं, लेकिन वे सीबीएसई बोर्ड की थ्योरी परीक्षा में फेल हो गए या उनके अंक बेहद कम आए। हितधारकों ने इसके लिए सीधे तौर पर बोर्ड के नए 'ऑनलाइन चेकिंग' (OSM) सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया।

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सीबीएसई ने किया 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) का बचाव

चौतरफा घिरने के बाद सीबीएसई ने आधिकारिक बयान जारी कर डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया का पुरजोर बचाव किया है। बोर्ड का तर्क है कि:

  • पारदर्शिता और निष्पक्षता: ओएसएम प्रणाली को उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अधिक समानता, निष्पक्षता और एकरूपता लाने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

  • मैनुअल गलतियों में कमी: डिजिटल चेकिंग से मानवीय गलतियों (Manual Mistakes) की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

  • स्टेप-वाइज़ मार्किंग: इस सिस्टम के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि छात्रों को उनके उत्तरों के आधार पर चरणबद्ध (Step-wise) अंक ठीक से दिए जाएं।

बोर्ड ने साफ किया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग परीक्षकों के बीच मूल्यांकन के दृष्टिकोण में अंतर को खत्म करने के लिए यह तकनीक बेहद जरूरी है।

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जानकारों की राय: तकनीक से ज्यादा अविश्वास का संकट

शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं के बड़े तनाव को दिखाता है। जानकारों के अनुसार, जब छात्रों और शिक्षकों को किसी नई मूल्यांकन तकनीक के बारे में पहले से पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती, तो वही तकनीक अविश्वास का कारण बन जाती है। विशेषज्ञों ने सीबीएसई से आग्रह किया है कि वह ओएसएम के तहत चरण-अंक आवंटन (Step-wise marking guidelines) के बारे में और अधिक स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करे, खासकर उन विषयों के लिए जहां आंशिक अंक (पार्शियल क्रेडिट) बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

19 मई से शुरू होगी पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) की प्रक्रिया

परिणाम से असंतुष्ट छात्रों को राहत देते हुए सीबीएसई ने घोषणा की है कि कक्षा 12वीं के लिए पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की प्रक्रिया 19 मई 2026 से शुरू होने जा रही है।

  • जो छात्र अपने नंबरों से खुश नहीं हैं, उन्हें सबसे पहले अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन करना होगा।

  • उत्तर पुस्तिका की समीक्षा करने के बाद, छात्र किसी विशिष्ट प्रश्न के उत्तर के सत्यापन (Verification) या पुनर्मूल्यांकन के लिए अपील कर सकेंगे।

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि री-इवैल्यूएशन के दौरान अंकों में कोई भी विसंगति या गड़बड़ी पाई जाती है, तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बोर्ड की अपील: अफवाहों से बचें, आधिकारिक चैनलों का करें उपयोग

सीबीएसई ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों या भ्रामक दावों का हिस्सा बनने के बजाय बोर्ड के आधिकारिक शिकायत निवारण चैनलों का उपयोग करें। बोर्ड ने यह भी याद दिलाया कि नियमों के मुताबिक, जो छात्र किसी एक विषय में अनुत्तीर्ण (Fail) हुए हैं, वे पात्रता मानदंडों को पूरा करने की स्थिति में कंपार्टमेंट परीक्षा (Compartment Examination) के लिए आवेदन कर सकते हैं।

पुनर्मूल्यांकन के लिए विस्तृत शेड्यूल, समय-सीमा और आवेदन शुल्क की जानकारी जल्द ही सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दी जाएगी।