Acharya Sitaram Chaturvedi College News: आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय में IQAC और NAAC पर मंथन
उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन के लिए IQAC और NAAC की भूमिका पर प्रो. संजीव कुमार ने दिया मार्गदर्शन, प्राचार्य प्रो. राम नरेश शर्मा की अध्यक्षता में पूरा हुआ प्रशिक्षण
भदैनी मिरर (शिक्षा डेस्क): वाराणसी के रामनगर (डोमरी) स्थित आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय में चल रहे छः दिवसीय 'टीचर्स ओरिएंटेशन प्रोग्राम' का शुक्रवार (14 अगस्त) को गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिन “IQAC एवं NAAC: उच्च शिक्षा में गुणवत्ता आश्वासन” विषय पर विशेष व्याख्यान एवं मार्गदर्शन सत्र का आयोजन किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. राम नरेश शर्मा ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में वसंता कॉलेज फॉर वूमेन (राजघाट) के इतिहास विभाग के प्रो. संजीव कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर महाविद्यालय की निदेशक प्रो. कल्पलता पाण्डेय भी विशेष रूप से मौजूद रहीं।

गुणवत्ता केवल मूल्यांकन तक सीमित नहीं, यह निरंतर प्रक्रिया है: प्रो. संजीव कुमार
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य प्रो. राम नरेश शर्मा ने मुख्य वक्ता प्रो. संजीव कुमार का औपचारिक स्वागत एवं सम्मान किया। इसके बाद मुख्य वक्ता ने उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक माहौल विकसित करने, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की भूमिका और NAAC मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला।


"उच्च शिक्षा में गुणवत्ता केवल मूल्यांकन और प्रत्यायन (Accreditation) तक सीमित नहीं है। यह शिक्षण-अधिगम, शोध, नवाचार, प्रशासन तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। IQAC महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने वाली सबसे मजबूत कड़ी है।" — प्रो. संजीव कुमार (मुख्य वक्ता)
उन्होंने शिक्षकों को अभिलेखों (Records) के व्यवस्थित संधारण और गुणवत्ता सुधार की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
औपचारिकता नहीं, विकास का जरिया है NAAC: प्रो. राम नरेश शर्मा
अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. राम नरेश शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए प्रत्येक शिक्षक और कर्मचारी की सक्रिय भूमिका अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि IQAC और NAAC से जुड़ी प्रक्रियाओं को महज एक औपचारिकता न मानकर संस्थान के निरंतर विकास और शैक्षणिक संवर्धन का माध्यम बनाया जाना चाहिए।
6-दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम का रिपोर्ट प्रस्तुत
-
संचालन व स्वागत: कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. लक्ष्मी ने किया, जबकि स्वागत वक्तव्य डॉ. सूर्य प्रकाश वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया।
-
प्रतिवेदन एवं धन्यवाद: कार्यक्रम के अंत में डॉ. प्रतिमा राय ने धन्यवाद ज्ञापन दिया और छः दिवसीय प्रशिक्षण सत्रों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस ओरिएंटेशन प्रोग्राम ने शिक्षकों के कौशल, ज्ञान और शिक्षण क्षमता को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस अवसर पर संस्थान की निदेशक प्रो. कल्पलता पाण्डेय सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे और इसे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक बेहतरीन पहल बताया।
