सुप्रीम कोर्ट की BCI को दो-टूक: मनन कुमार मिश्रा लोकतांत्रिक नहीं, प्रो-टेम चेयरमैन; बिना AG-SG के नहीं ले सकते नीतिगत फैसले
CJI सूर्य कांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा- नई बार काउंसिल के चुनाव तक सिर्फ रोजमर्रा का काम देखें मिश्रा, पॉलिसी फैसलों में अटॉर्नी जनरल की मौजूदगी जरूरी
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल और शक्तियों को लेकर उच्चतम न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि मनन कुमार मिश्रा लोकतांत्रिक रूप से चुने गए अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि केवल एक 'प्रो-टेम' (अस्थायी) चेयरमैन की भूमिका में हैं। लिहाजा, वे नई काउंसिल के गठन तक केवल संस्था के रोजमर्रा के कामकाज ही निपटा सकते हैं।


मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने BCI के नियमों के तहत निर्धारित अवधि से अधिक समय तक अध्यक्ष पद पर बने रहने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यह सुनवाई की।
नीतिगत बैठकों में AG और SG की मौजूदगी अनिवार्य

न्यायालय ने निर्देश दिया कि जब तक स्टेट बार काउंसिल के चुनाव के बाद BCI का नया लोकतांत्रिक गठन नहीं हो जाता, तब तक कोई भी महत्वपूर्ण या नीतिगत फैसला अकेले नहीं लिया जाएगा।
पीठ ने कहा कि BCI के स्थायी पदेन (ex-officio) सदस्य होने के नाते भारत के अटॉर्नी जनरल (AG) और सॉलिसिटर जनरल (SG) को ऐसी सभी महत्वपूर्ण बैठकों में आमंत्रित किया जाए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने स्पष्ट किया कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 4(3) के तहत रोजमर्रा का काम चलाना ठीक है, लेकिन नीतिगत मामलों में अटॉर्नी जनरल की मौजूदगी अनिवार्य होगी।


निट्स और विवादों के बीच सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
यह पूरा मामला NALSAR विश्वविद्यालय विवाद के बाद तूल पकड़ा था, जिसमें मनन कुमार मिश्रा ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI को आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताने वाले स्नातकों के नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दे दिया था। चौतरफा आलोचना के बाद उन्होंने माफी तो मांग ली थी, लेकिन उनके लंबे कार्यकाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई।
जल्द चुनाव कराने के दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने नई स्टेट बार काउंसिलों के नोटिफिकेशन जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है, ताकि तय समय सीमा के भीतर BCI के लिए नए प्रतिनिधियों का चुनाव हो सके। BCI का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि भविष्य में किसी भी बड़े नीतिगत निर्णय में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
