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तो हमें मंजूर नहीं होगा; सुप्रीम कोर्ट के सामने CJP ने रखी अपनी शर्तें, जानें क्या है पूरा मामला

'निष्पक्ष हों सदस्य, वरना स्वीकार नहीं करेंगे कमिटी' - सौरभ दास

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Saurabh Das
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दिल्ली में संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस द्वारा कथित बलप्रयोग की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee) गठित करने की बात कही गई है। हालांकि, इस पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी शर्तें रखते हुए स्पष्ट किया है कि यदि यह समिति बनती है, तो इसके सदस्यों का चयन पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए।

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CJP के सह-संयोजक सौरभ दास और लीगल सेल प्रमुख रत्ना सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए अपनी मांगें सामने रखीं।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: रिटायर्ड जज और पूर्व DGP हो सकते हैं शामिल

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने प्रदर्शनकारी युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है।

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  • समिति की संभावित संरचना: इसमें रिटायर्ड जज, पूर्व DGP और पूर्व CBI डायरेक्टर जैसे सदस्यों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

  • सुझाव आमंत्रित: बेंच ने कहा है कि विभिन्न पक्षों से सुझाव मिलने के बाद समिति के अंतिम गठन का आदेश जारी किया जाएगा।

'निष्पक्ष हों सदस्य, वरना स्वीकार नहीं करेंगे कमिटी' — सौरभ दास

CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि न्याय के लिए समिति का गठन जरूरी है, तो इसके सदस्यों का चुनाव बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश के युवा और जेन जी (Gen Z) सुप्रीम कोर्ट की ओर उम्मीद से देख रहे हैं। यदि समिति में ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिनकी निष्ठा या रिकॉर्ड पर पहले से सवाल हैं, तो युवाओं को यह स्वीकार नहीं होगा। यह सुप्रीम कोर्ट की समिति है, इसलिए इसके मानक सर्वोच्च और स्वतंत्र होने चाहिए।

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CJP के सदस्यों को भी मिले समिति में जगह: रत्ना सिंह

CJP की लीगल सेल प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से किसी जांच समिति के पक्ष में नहीं थे, बल्कि उन्हें दिए गए आश्वासनों को पूरा करने की उम्मीद थी।

  • मुख्य मांगें:

    1. समिति पूरी तरह से स्वतंत्र हो और इसके सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।

    2. जांच प्रक्रिया के दौरान दी जाने वाली जानकारियों के सत्यापन (verification) के लिए CJP के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया जाए।

    3. प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गई सभी FIR को वादे के मुताबिक तुरंत रद्द किया जाए।