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Rupee Falls: डॉलर के मुकाबले पहली बार ₹94 के पार रुपया, जानें आम जनता पर क्या पड़ेगा असर

मिडिल ईस्ट तनाव और महंगे कच्चे तेल से टूटा रुपया, महंगाई बढ़ने के संकेत; एक्सपर्ट बोले- अभी और उतार-चढ़ाव संभव

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रुपए डालर
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नई दिल्ली: भारतीय मुद्रा ने शुक्रवार को ऐतिहासिक गिरावट दर्ज करते हुए नया निचला स्तर छू लिया। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पहली बार ₹94 के पार पहुंच गया और करीब ₹94.15 के स्तर तक गिर गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक हालात और बढ़ते कच्चे तेल के दामों ने रुपये पर भारी दबाव डाला है।
 क्यों टूट रहा है रुपया?
रुपये की गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण Middle East में जारी तनाव है।
इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।
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इसके अलावा वैश्विक बाजारों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में तेजी ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है।
वैश्विक संकेतों का भी असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर United States की नीतियों और बयानों का भी असर पड़ा है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के विरोधाभासी बयानों से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया।
आगे क्या रहेगा रुख?
फॉरेक्स विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार फिलहाल अनिश्चितता के दौर में है।
* अगर वैश्विक तनाव कम होता है तो रुपया ₹1–₹1.5 तक मजबूत हो सकता है
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* 94.00–94.20 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है
* 92.80–93.00 के बीच सपोर्ट देखने को मिल सकता है
केंद्रीय बैंक की संभावित दखल से भी बाजार में स्थिरता आ सकती है।
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
पेट्रोल-डीजल और महंगाई
भारत अपनी जरूरत का 75–80% कच्चा तेल आयात करता है। रुपया कमजोर होने से तेल महंगा होता है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
अनुमान के मुताबिक, रुपये में ₹1 की गिरावट से तेल कंपनियों पर करीब ₹8,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
 दवाएं और पढ़ाई महंगी
विदेश से आने वाली दवाएं महंगी हो जाती हैं।
विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च भी बढ़ जाता है।
विकास योजनाओं पर असर
डॉलर महंगा होने से सरकार का खर्च बढ़ता है। इससे सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं पर बजट प्रभावित हो सकता है।
चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा
जब आयात ज्यादा और निर्यात कम होता है, तो देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाता है। इससे चालू खाता घाटा बढ़ता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय होता है।
* Rupee vs Dollar
* INR गिरावट कारण
* Rupee falls to 94
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* Dollar rate today India
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