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दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ का महाघोटाला: पूर्व DGHS वत्सला अग्रवाल गिरफ्तार, सरकार ने 7 कर्मियों को किया सस्पेंड

चिकित्सा उपकरण खरीद में धांधली पर ACB का बड़ा एक्शन, कोर्ट ने आरोपी को पुलिस रिमांड पर भेजा

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केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के 5 फार्मासिस्ट और 2 बड़े अधिकारी निलंबित, नाम अभी गोपनीय

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का सख्त रुख: भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति

 

 

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग में हुए 650 करोड़ रुपये के बड़े चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी की टीम ने दिल्ली की पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने उन्हें चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। गौरतलब है कि इस मामले में एसीबी केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद कुमार रंगा को पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुकी है।

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लापरवाही और धांधली पर सरकार का हंटर, 7 कर्मचारी निलंबित

इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद दिल्ली सरकार के स्तर पर भी कड़ा एक्शन लिया गया है। केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के अलग-अलग स्टोर्स की जांच में भारी अनियमितताएं और गड़बड़ी पाए जाने पर पांच फार्मासिस्टों और दो बड़े अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद, भंडारण और मैनेजमेंट में गंभीर लापरवाही बरतने के कारण इन पर यह गाज गिरी है। हालांकि, विभागीय स्तर पर अभी इन कर्मियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है।

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क्या है 650 करोड़ रुपये का यह पूरा घोटाला?

यह पूरा मामला केंद्रीय प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए दिल्ली सरकार के विभिन्न सरकारी अस्पतालों के लिए सर्जिकल सामान, जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य सामग्रियों की खरीद में हुई कथित धांधली से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया, बाजार की वास्तविक दरों से कहीं अधिक कीमतों पर सामान खरीदे गए, और बिना जरूरत के भी सामानों की अंधाधुंध खरीद दिखाकर कुछ चुनिंदा सप्लायर्स और वेंडरों को अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया गया।

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वेंडरों से पूछताछ जारी, कई और रडार पर

घोटाले की जड़ें खंगालने में जुटी एसीबी की टीम इस समय स्वास्थ्य विभाग के अन्य बाबुओं, अधिकारियों और इस खरीद प्रक्रिया से जुड़े प्राइवेट वेंडरों को हिरासत में लेकर लगातार पूछताछ कर रही है। सूत्रों का कहना है कि टेंडर की फाइलों के अप्रूवल, भुगतान के तरीके और कंपनियों के बैकग्राउंड की बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है। जांच एजेंसी का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और रसूखदार चेहरे इस मामले में गिरफ्तार हो सकते हैं।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग है। सरकारी व्यवस्था में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक लापरवाही या भ्रष्टाचार को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। जांच पूरी तरह स्वतंत्र होकर चल रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।