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PMO अब ‘सेवातीर्थ’: देशभर में राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोकभवन’, 8 राज्यों ने शुरू किया अमल

केंद्र सरकार ने कहा-‘राजभवन’ औपनिवेशिक मानसिकता का प्रतीक; गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद राज्यों ने तेज किया नाम बदलने का अभियान

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नई दिल्ली। देश में सरकारी प्रतिष्ठानों के नाम भारतीय संस्कृति और जनभागीदारी के अनुरूप किए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर अब ‘सेवातीर्थ’ कर दिया गया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए देशभर में राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोकभवन’ तथा राज निवासों का नाम ‘लोक निवास’ करने का निर्देश जारी किया है।

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सरकार का मानना है कि ‘राजभवन’ शब्द औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है, इसलिए इसे भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनता की अवधारणा से जोड़ते हुए बदलना आवश्यक है। इससे पहले केंद्र सरकार ने दिल्ली में राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया था, जबकि प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के नाम से जाना जाता है।

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गृह मंत्रालय ने राज्यों को भेजा निर्देश

गृह मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल और उपराज्यपाल कार्यालयों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर नाम परिवर्तन को तत्काल लागू करने को कहा है। मंत्रालय ने पत्र में पिछले वर्ष हुए राज्यपाल सम्मेलन का जिक्र किया है, जिसमें राजभवन शब्द को हटाने और ‘लोकभवन’ अपनाने का सुझाव दिया गया था।

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निर्देश में कहा गया है कि राज्यपाल और लेफ्टिनेंट गवर्नर के सभी आधिकारिक कार्यों में अब ‘लोकभवन’ और ‘लोक निवास’ नाम का उपयोग किया जाए, ताकि औपनिवेशिक प्रभाव समाप्त हो सके।

इन राज्यों ने लागू किया नया नाम

गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद कई राज्यों ने तेजी से अपने राजभवनों के नाम बदलने शुरू कर दिए हैं।
अब तक इन राज्यों ने *राजभवन* का नाम बदल दिया है-

  • पश्चिम बंगाल – लोकभवन
  • तमिलनाडु – लोकभवन
  • केरल – लोकभवन
  • असम – लोकभवन
  • उत्तराखंड – लोकभवन
  • ओडिशा – लोकभवन
  • गुजरात – लोकभवन
  • त्रिपुरा – लोकभवन
  • लद्दाख – लोक निवास
  • राजस्थान – नाम बदलने की औपचारिक घोषणा कर दी है

इसके साथ ही आने वाले समय में अन्य राज्यों से भी इसी तरह के निर्णय की उम्मीद है।

औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने की निरंतर प्रक्रिया

मोदी सरकार लंबे समय से देश में अंग्रेजों के शासनकाल की प्रतीकों और नामों को बदलने के अभियान पर काम कर रही है।

– बीटिंग रिट्रीट समारोह में अब अंग्रेजी गीतों के बजाय भारतीय धुनें शामिल की जाती हैं।
– केंद्र सरकार की वेबसाइटों पर अब हिंदी कंटेंट प्राथमिकता में दिखाई देता है।
– दिल्ली के कई महत्वपूर्ण मार्गों और सरकारी संस्थानों के नाम बदले गए हैं।

सरकार का कहना है कि यह अभियान आधुनिक भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और औपनिवेशिकता के अवशेषों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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