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'मिर्जापुर: द मूवी' से 'शूरवीर' गाना हटाने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर

महाराणा प्रताप को समर्पित गीत का गैंगस्टरों के महिमामंडन में इस्तेमाल करने का आरोप, कोर्ट से दिशानिर्देश जारी करने की मांग।

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भदैनी मिरर (मनोरंजन एवं लीगल डेस्क): बहुचर्चित फिल्म "मिर्जापुर: द मूवी" अपनी रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। फिल्म के क्लाइमेक्स दृश्य में इस्तेमाल किए गए "शूरवीर" गाने को हटाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि भारत के महान ऐतिहासिक नायक महाराणा प्रताप को समर्पित इस सम्मानजनक गीत का उपयोग काल्पनिक अपराधियों और गैंगस्टरों का महिमामंडन करने के लिए किया जा रहा है।

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महाराणा प्रताप की विरासत के अपमान का आरोप

यह याचिका प्रशांत कुमार सिंह द्वारा अधिवक्ता शशांक और शाश्वत के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि 'शूरवीर' ट्रैक मूल रूप से राष्ट्रनायक महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बनाया गया था। ऐसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण गीत को सिनेमाई अपराधियों और गैंगस्टरों की पृष्ठभूमि (Background) में बजाना देश की सांस्कृतिक विरासत को गहरा नुकसान पहुंचाता है।

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सांस्कृतिक संदर्भ विकृत होने की आशंका

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि यदि फिल्म में इस गाने का उपयोग इसी रूप में किया गया, तो सार्वजनिक स्मृति और जनमानस में एक गलत संदेश जाएगा। इससे महाराणा प्रताप जैसी ऐतिहासिक शख्सियत का संबंध काल्पनिक गैंगस्टरों से जुड़ने का भ्रम पैदा होगा, जो उनकी गौरवशाली विरासत का सीधा अपमान है।

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कोर्ट से की गई प्रमुख मांगें:

  • गाना हटाने का निर्देश: फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' के क्लाइमेक्स दृश्य से 'शूरवीर' गाने को तत्काल हटाने या बदलने का निर्देश जारी किया जाए।

  • दिशा-निर्देश तय करने की मांग: कोर्ट ऐतिहासिक या सांस्कृतिक व्यक्तित्वों से जुड़े गीतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित गाइडलाइंस बनाए।

  • अभिव्यक्ति की आजादी में संतुलन: यह सुनिश्चित किया जाए कि कलात्मक और रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर ऐतिहासिक नायकों का जुड़ाव आपराधिक या असामाजिक आचरण के साथ न किया जा सके।

अब देखना यह होगा कि दिल्ली हाईकोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और फिल्म के निर्माताओं की ओर से इस पर क्या सफाई आती है।