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किराएदार ने खुद को बताया मकान मालिक, अजीब दलील सुनकर दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

'किराया न लेने से मिला मालिकाना हक'—किराएदार का दावा; कोर्ट ने कहा: मकान मालिक के हक को नकारा तो नहीं मिलेगा कानूनी संरक्षण

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नई दिल्ली / भदैनी मिरर: पुरानी दिल्ली के एक किराए के मकान में दशकों से रह रहे एक किराएदार द्वारा खुद को ही संपत्ति का मालिक बताने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। किराएदार ने दिल्ली हाई कोर्ट में दलील दी कि लंबे समय से मकान मालिक ने उससे किराया नहीं लिया है, लिहाजा अब उसे उस प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक मिल चुका है। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति एक ही समय में दो अलग-अलग रुख नहीं अपना सकता।

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कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि कोई किराएदार मकान मालिक के मालिकाना हक को ही नकार देता है, तो वह किराएदार के रूप में मिलने वाले कानूनी संरक्षण का दावा भी खो बैठता है।

₹20 महीने पर शुरू हुई थी किराएदारी

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने अहाता किदारा (बाड़ा हिंदू राव) स्थित प्रॉपर्टी के मामले में याचिकाकर्ता मोहम्मद महबूब की नियमित दूसरी अपील को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने उसके खिलाफ प्रॉपर्टी खाली कराने के निचले न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा।

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यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब संपत्ति की वास्तविक मालकिन अर्शी कुरैशी और इरम ने बेदखली का मुकदमा दायर किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह संपत्ति 1992 में रजिस्टर्ड सेल डीड (Sale Deed) के जरिए खरीदी गई थी। महबूब के पिता अल्लाह रक्खा को मूल रूप से मात्र ₹20 प्रति माह के किराए पर यह जगह दी गई थी।

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कोर्ट ने कहा- खत्म हो जाते हैं किराएदारी के अधिकार

किराया न देने और बिना अनुमति ढांचे में बदलाव करने पर मकान मालिकों ने किराएदारी खत्म करने का कानूनी नोटिस भेजा था। इसके जवाब में महबूब ने कोर्ट में दावा कर दिया कि किराया न वसूले जाने के कारण वह खुद मालिक बन चुका है।

स्थानांतरण संपत्ति अधिनियम (Transfer of Property Act) की धारा 111(g) का उल्लेख करते हुए हाई कोर्ट ने साफ किया कि जब कोई किराएदार मकान मालिक के स्वामित्व से इनकार करता है, तो उसी क्षण उसकी किराएदारी के अधिकार समाप्त हो जाते हैं। कोर्ट ने माना कि महबूब ने खुद किराएदार होने से इनकार किया था, इसलिए अब वह अनधिकृत कब्जेदार (Unauthorized Occupant) की स्थिति में आ गया है और किसी सुरक्षा का हकदार नहीं है।