वाराणसी: गैंगरेप में सहयोग की आरोपित महिला को मिली जमानत, कोर्ट ने रिहा करने का दिया आदेश
शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण और सामूहिक दुष्कर्म के षड्यंत्र का था आरोप, बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दी राहत।
वाराणसी। जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट (प्रथम) कुलदीप सिंह की अदालत ने गैंगरेप के मामले में सहयोग करने की आरोपित महिला किरन को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए जौनपुर निवासी आरोपिता को एक लाख रुपये की जमानत और इतनी ही धनराशि के बंधपत्र (Bond) प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश जारी किया।


अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, रोहित यादव व संदीप यादव ने अपनी दलीलें पेश कीं।
क्या था पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, चौबेपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता ने थाने में दर्ज प्राथमिकी में बताया था कि वह पिछले एक साल से चंदौली निवासी प्रभाकर निषाद के संपर्क में थी। आरोप था कि प्रभाकर ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इस कृत्य में किरन सिंह ने उसका सहयोग किया।

पीड़िता का आरोप है कि जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया, तो प्रभाकर मुकर गया। इसके बाद 24 फरवरी 2026 को आरोपिता किरन उसे बहला-फुसलाकर चंद्रावती बाजार ले गई। आरोप है कि वहां किरन ने फोन कर पांच युवकों को बुलाया, जिन्होंने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने पीड़िता के कलमबंद बयान के आधार पर किरन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

अदालत में बचाव पक्ष की दलीलें:
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि प्राथमिकी (FIR) के प्रारंभिक चरण में पीड़िता ने केवल प्रभाकर निषाद पर ही आरोप लगाए थे। विवेचना के दौरान रंजिश और असत्य तथ्यों के आधार पर किरन का नाम इस केस में घसीटा गया है। अधिवक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि पीड़िता के परिवार और किरन के मायके वालों के बीच पुराना विवाद चल रहा है।
अदालत में दलील दी गई कि पीड़िता ने अपने बयान में केवल यह कहा कि किरन उसे बाजार में छोड़कर चली गई थी, जिसका कोई भी चश्मदीद गवाह मौजूद नहीं है। अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपिता किरन की जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
