Varanasi: 50 हजार का कर्ज, 2.30 लाख का ब्याज और सोने की बलि! सूदखोरों से तंग आकर काशीपुरा के युवक ने रेता गला
500 रुपये रोजाना देने के बावजूद 2.30 लाख का बना दिया ब्याज, CP के आदेश पर FIR दर्ज
भदैनी मिरर (Bhadaini Mirror) डेस्क: धर्मनगरी वाराणसी में अवैध ब्याज वसूली और सूदखोरों का जाल किस कदर जानलेवा बनता जा रहा है, इसका एक खौफनाक मामला सामने आया है। शहर के काशीपुरा क्षेत्र में सूदखोरों के उत्पीड़न और लगातार मिल रही धमकियों से तंग आकर शाश्वत कसेरा नाम के युवक ने अपने गले पर ब्लेड मारकर आत्महत्या का प्रयास किया।


पीड़ित परिवार द्वारा पुलिस आयुक्त (CP) कार्यालय में लगाई गई गुहार के बाद हरकत में आई चौक पुलिस ने आरोपी अंकित मिश्रा और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
500 रुपये रोजाना देने के बावजूद 2.30 लाख का बना दिया ब्याज
शाश्वत की मां सरिता देवी द्वारा पुलिस आयुक्त को दी गई शिकायत के अनुसार, उनके बेटे ने अपने ही एक परिचित भुलेटन निवासी अंकित मिश्रा से जरूरत के वक्त 50 हजार रुपये उधार लिए थे। इस कर्ज के एवज में शाश्वत रोजाना 500 रुपये की किस्त अंकित को चुका रहा था।

इतना भारी ब्याज चुकाने के बावजूद, आरोपी ने खातों में हेरफेर और धोखाधड़ी कर 50 हजार की रकम का ब्याज बढ़ाकर 2 लाख 30 हजार रुपये बना दिया और दबाव बनाना शुरू कर दिया।
सोने के गहने बिकवाए, ब्लैंक चेक और गाड़ी पर भी किया कब्जा
सूदखोरी का यह खेल यहीं नहीं रुका। रकम की उगाही के नाम पर आरोपी अंकित मिश्रा ने पीड़ित परिवार का आर्थिक और मानसिक शोषण करना शुरू कर दिया:


-
जेवर बिकवाए: कर्ज चुकता करने के नाम पर पीड़ित परिवार के घर में रखे लगभग 66 ग्राम सोने के आभूषण (जिसमें सोने की चेन, हार, चूड़ियां शामिल थीं) जबरन बिकवा कर पैसे हड़प लिए।
-
चेक और स्टाम्प जब्त: शाश्वत से सादे कागजों, स्टाम्प पेपर और बैंक ऑफ बड़ौदा के 7 हस्ताक्षरित (Signed) चेक अपने पास सिक्योरिटी के नाम पर ऐंठ लिए।
-
गाड़ी और बीसी हड़पी: आरोपी ने शाश्वत की बीसी (Committee) के 6 लाख रुपये अवैध रूप से अपने पास रख लिए और उसके नाम पर फाइनेंस कराई गई गाड़ी को भी जबरन अपने कब्जे में ले लिया।
चौक पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल, CP के आदेश पर जागा तंत्र
इन सभी प्रताड़नाओं से तंग आकर 9 जुलाई को शाश्वत कसेरा ने जान देने की नीयत से ब्लेड से अपना गला रेत लिया। किसी तरह परिजनों ने उसकी जान बचाई, जिसके बाद शाश्वत ने आपबीती सुनाई।
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने 13 जुलाई को ही चौक थाने में इस बाबत लिखित तहरीर दी थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसके बाद पीड़ित मां सरिता देवी ने पुलिस आयुक्त से न्याय की गुहार लगाई। पुलिस आयुक्त के सख्त रुख के बाद चौक पुलिस ने आरोपी अंकित मिश्रा व पांच अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
निष्कर्ष: बनारस में पैर पसार रहे अवैध सूदखोरों का नेटवर्क आम लोगों की जिंदगियां तबाह कर रहा है। भदैनी मिरर अपने पाठकों से अपील करता है कि किसी भी प्रकार की आपातकालीन वित्तीय जरूरत के लिए केवल अधिकृत बैंकों या वित्तीय संस्थानों का ही सहारा लें और अवैध सूदखोरों के चंगुल से बचें।
