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Varanasi Cyber Fraud: टेलीग्राम पर शेयर बाजार का लालच देकर बनारस के युवक से 17.12 लाख की ठगी, 'मुनाफा' भी निकला चोरी का!

कैंट के सिकरौल निवासी युवक को 'नालंदा कैपिटल' का फर्जी रिप्रजेंटेटिव बनकर ठगों ने जाल में फंसाया; पटना साइबर पुलिस की एंट्री के बाद खुला राज।

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वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी काशी में साइबर अपराधियों का जाल लगातार पैर पसार रहा है। ताजा मामला वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र के सिकरौल इलाके से सामने आया है, जहां शेयर बाजार (Share Market) में ब्लॉक ट्रेडिंग के जरिए कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर एक युवक से 17.12 लाख रुपये की सनसनीखेज साइबर ठगी को अंजाम दिया गया है। पीड़ित युवक कपिल देव राजभर की शिकायत पर रविवार रात वाराणसी के साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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'नताली' प्रोफाइल और फर्जी 'नालंदा कैपिटल' का मायाजाल

पीड़ित कपिल देव राजभर ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले टेलीग्राम पर 'नताली' नाम के एक प्रोफाइल से उनसे संपर्क किया गया था। इसके बाद उन्हें एक टेलीग्राम चैनल में जोड़ा गया, जहां ठगों ने खुद को 'नालंदा कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड' का प्रतिनिधि बताया। ठगों ने दावा किया कि वे 'ब्लॉक ट्रेडिंग' के जरिए बहुत कम समय में भारी रिटर्न दिला सकते हैं।

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यूं जीता भरोसा: ठगी के पैसे से ही दिया 'मुनाफा'

साइबर जालसाजों ने पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया:

  • शुरुआत में 21 और 25 मार्च को पीड़ित से 5,000 और 10,000 रुपये का छोटा ऑनलाइन निवेश कराया गया।

  • इसके बाद 8 अप्रैल को ठगों ने पीड़ित के बैंक खाते में 15,000 रुपये 'मुनाफे' के तौर पर ट्रांसफर कर दिए।

इस शुरुआती मुनाफे को देखकर पीड़ित को कंपनी पर पूरा भरोसा हो गया। लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू हुआ।

टुकड़ों में ऐठे 17.12 लाख रुपये

भरोसा कायम होने के बाद ठगों ने बड़े निवेश के नाम पर अलग-अलग तारीखों में पैसे मंगवाने शुरू किए:

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  • 9 अप्रैल को यूपीआई (UPI) के जरिए 92,000 रुपये जमा कराए गए।

  • 16 अप्रैल को दो किश्तों में 5 लाख और 55,000 रुपये ट्रांसफर करवाए गए।

  • मई महीने में अलग-अलग तारीखों में 50,000 रुपये, 5 लाख रुपये और फिर दोबारा 5 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली गई।

जब पीड़ित ने अपनी कुल जमा राशि और मुनाफे को अपने डिमैट अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहा, तो ठगों ने 25 लाख 48 हजार रुपये की अतिरिक्त डिमांड रख दी। साथ ही धमकी दी कि अगर पैसे जमा नहीं किए तो पुराना सारा फंड फ्रीज हो जाएगा।

पटना पुलिस की एंट्री से खुला ठगी का 'लूप'

इस मामले में चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब 6 जून को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने पीड़ित को सूचित किया कि उनके खाते में आए 15,000 रुपये को साइबर पुलिस ने होल्ड (फ्रीज) कर दिया है। जब पीड़ित ने पड़ताल की तो पता चला कि यह कार्रवाई पटना साइबर पुलिस की तरफ से की गई थी। दरअसल, जालसाजों ने पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए जो 15,000 रुपये का कथित मुनाफा भेजा था, वह भी किसी अन्य व्यक्ति से की गई साइबर ठगी का ही पैसा था।

जांच में जुटी साइबर सेल

मामले की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी साइबर थाना पुलिस एक्टिव हो गई है। सहायक पुलिस आयुक्त (ACP साइबर) विदुष सक्सेना ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिस टेलीग्राम आईडी और बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उन्हें ट्रैक किया जा रहा है। जल्द ही जालसाज पुलिस की गिरफ्त में होंगे।