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Varanasi: Gay Dating Apps से ठगी करने वाला शातिर गिरफ्तार, 8 फरार

 'पोलो' और 'ग्राइंडर' ऐप के जरिये लोगों को मिलने बुलाते थे बदमाश, फिर मोबाइल छीनकर साफ करते थे बैंक खाता
 

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वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): वाराणसी के बड़ागांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत समलैंगिक डेटिंग ऐप्स के जरिए भोली-भाली जनता को जाल में फंसाकर ऑनलाइन ठगी करने वाले एक बेहद शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के एक मुख्य सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसके 8 अन्य साथी फरार होने में सफल रहे जिनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है।

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यह गिरोह 'पोलो' (Polo) और 'ग्राइंडर' (Grindr) जैसे समलैंगिक दोस्ती ऐप्स का सहारा लेकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था और मिलने के बहाने बुलाकर उनके बैंक खातों से ऑनलाइन रकम साफ कर देता था।

एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल की शिकायत पर खुली पोल

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित मिथिलेश रघुवंशी ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर ₹85,000 की ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल और बड़ागांव पुलिस की टीम सक्रिय हुई और ठगों के नेटवर्क को खंगालना शुरू किया।

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जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि समलैंगिक दोस्ती ऐप के जरिए पीड़ित को फंसाकर सातोमहुआ अहरक गांव के पास बुलाया गया था, जहां गिरोह के 7-8 लड़के पहले से ही जाल बिछाए बैठे थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घेराबंदी की और मौके से आरोपी आदर्श चौबे (निवासी परसादपुर, बड़ागांव) को दबोच लिया, जबकि उसके अन्य साथी पुलिस को देखकर भाग निकले।

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कैसे काम करता था यह 'गंदा खेल'?

गिरफ्तार आरोपी आदर्श चौबे ने पूछताछ में पुलिस के सामने इस गिरोह के काम करने के अनोखे और शातिराना तरीके का खुलासा किया। उसने बताया:
"हम लोग 'पोलो' और 'ग्राइंडर' ऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर समलैंगिक प्रवृत्ति के लोगों से दोस्ती करते थे। इसके बाद उन्हें मीठी-मीठी बातों में फंसाकर सुनसान या तय स्थान पर मिलने के लिए बुलाते थे। जैसे ही पीड़ित हमसे मिलने पहुंचता था, गिरोह के सभी सदस्य उसे घेर लेते थे। इसके बाद डरा-धमकाकर उसका मोबाइल अपने कब्जे में ले लेते और उसके फोन से धोखे से यूपीआई (UPI) या नेट बैंकिंग के जरिए अपने खातों में पैसे ट्रांसफर कर लेते थे।"

आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि यह खेल पिछले कई महीनों से चल रहा था। अधिकांश पीड़ित लोकलाज और समाज में बदनामी के डर से पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने नहीं जाते थे, जिसका फायदा उठाकर यह गिरोह बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहा था।

फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी

पुलिस अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। फरार आरोपियों की सूची इस प्रकार है- आयुष सिंह, उत्कर्ष सिंह, शनि शर्मा, अंकित सिंह, दिव्यांशु यादव, नितेश दुबे, हर्ष तिवारी और आयुष दीक्षित।

सराहनीय कार्य करने वाली टीम:
इस गिरोह का भंडाफोड़ करने वाली टीम में बड़ागांव थाने के उप निरीक्षक सुनील कुमार यादव, उप निरीक्षक अमन कुमार यादव, आरक्षी विकास कुमार और आरक्षी अजय यादव शामिल रहे।