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Varanasi: वाराणसी के चर्चित मनीष हत्याकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, 4 आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज

क्रूरता की हदें पार: पीट-पीटकर मार डाला, फिर निकाल लीं आँखें

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Manish singh murder
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वाराणसी/भदैनी मिरर डेस्क: वाराणसी के दोना-पत्तल कारोबारी मनीष कुमार सिंह की नृशंस हत्या के मामले में अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। प्रभारी जिला जज संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने इस हत्याकांड के चार मुख्य आरोपियों—नागेंद्र राजभर, गोविंद राजभर, आशीष राजभर और मनीष राजभर की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

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अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) मुनीब सिंह चौहान और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक सिंह प्रिंस ने मजबूती से पैरवी की। अभियोजन ने कोर्ट के सामने तर्क रखा कि आरोपियों का यह कृत्य न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला था, बल्कि इसमें बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गई थीं, इसलिए इन्हें जमानत का कोई आधार नहीं बनता।

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क्या था पूरा मामला?

यह सनसनीखेज वारदात 26 अप्रैल की रात करीब 10 बजे घटित हुई थी। घमहापुर (भरथरा) गांव के रहने वाले दोना-पत्तल कारोबारी मनीष कुमार सिंह अपनी फैक्ट्री से काम समेटकर कार से घर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक उनकी कार से सड़क किनारे बैठी एक महिला को हल्का धक्का लग गया, जिससे वह घायल हो गई।

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इस मामूली सड़क हादसे के बाद वहां मौजूद भीड़ उग्र हो गई। गुस्साए लोगों ने मनीष को कार से खींच लिया और लाठी-डंडों से उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया।

क्रूरता की हदें पार: पीट-पीटकर मार डाला, फिर निकाल लीं आँखें

हत्यारोपियों की बर्बरता: चश्मदीदों और पुलिसिया तफ्तीश के अनुसार, उग्र भीड़ और नामजद आरोपियों ने मनीष कुमार सिंह को तब तक बेरहमी से पीटा, जब तक कि उनकी सांसें नहीं थम गईं। क्रूरता की पराकाष्ठा पार करते हुए हत्यारोपियों ने मनीष की आँखें तक निकाल ली थीं। इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया था और स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला था।

पुलिस की प्रभावी चार्जशीट के बाद कोर्ट की सख्ती

भदैनी मिरर को मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए थे। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता, गवाहों की सुरक्षा और वारदात के वीभत्स तरीके को देखते हुए चारों आरोपियों को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रखने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय की दिशा में इसे एक बड़ा कदम बताया है।