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Varanasi: झारखंड में बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 4 किलो सोने की डकैती का पर्दाफाश, यूपी STF ने वाराणसी से मास्टरमाइंड समेत 3 को दबोचा

टीवी न्यूज देखकर मो. अफजल ने रची थी साजिश, 20 लाख कैश और सोना बरामद।

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वाराणसी: झारखंड के हजारीबाग स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हुई सनसनीखेज डकैती का खुलासा करते हुए यूपी एसटीएफ (STF) और झारखंड पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। शुक्रवार की रात वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र के सिंहपुर से एसटीएफ ने डकैती गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से डकैती का 912 ग्राम सोना, 20 लाख रुपये नकद और वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो बरामद की गई है।

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सारनाथ से दबोचे गए शातिर अपराधी

एसटीएफ फील्ड इकाई वाराणसी के निरीक्षक अमित श्रीवास्तव और अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई हुई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  1. मो. अफजल: गिरोह का सरगना (निवासी: नवादा, बिहार)

  2. पंकज सिंह उर्फ रौनक: (निवासी: गोरखपुर)

  3. सौरभ यादव उर्फ सोनू: (निवासी: मऊ)

झारखंड पुलिस इन आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर हजारीबाग ले गई है, जिन्हें 4 मई तक वाराणसी के सीजेएम कोर्ट में पेश करना अनिवार्य है।

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टीवी पर खबर देख कर बनाई थी डकैती की योजना

पूछताछ में मास्टरमाइंड मो. अफजल ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि टीवी पर ओडिशा के किलंजर में बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हुई 8 किलो सोने की लूट की खबर देखी थी। इसके बाद उसने तय किया कि वह भी इसी बैंक की किसी शाखा को निशाना बनाएगा। रेकी के दौरान हजारीबाग की बरही शाखा उन्हें मुफीद लगी क्योंकि यह बाजार से दूर और कम भीड़-भाड़ वाले इलाके में स्थित थी।

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फिल्म 'स्पेशल 26' की तरह फिल्मी अंदाज में वारदात

24 अप्रैल को दोपहर 3:15 बजे अपराधी बैंक में दाखिल हुए। आरोपियों ने बैंक कर्मियों को असलहे के बल पर बंधक बनाया। पंकज सिंह ने कटर से अलार्म का तार काट दिया और एक बैंक कर्मी की कनपटी पर पिस्टल सटाकर स्ट्रॉन्ग रूम खुलवाया। इसके बाद 4 किलो सोना और 42 लाख रुपये लेकर फरार हो गए। वारदात के बाद आरोपी पैसा और सोना आपस में बांटकर वाराणसी पहुंचे थे और यहाँ से दिल्ली भागने की फिराक में थे।

जेल में बनी थी अपराधियों की 'कंपनी'

सरगना मो. अफजल का आपराधिक इतिहास पुराना है। वह 2008 में कोलकाता के एक कोयला व्यवसायी की हत्या में जेल गया था। 2008 से 2012 के बीच जेल में ही उसकी मुलाकात गोरखपुर के पंकज और अन्य अपराधियों से हुई। जेल से छूटने के बाद इस गिरोह ने बंगाल, दिल्ली, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में सोने की कई बड़ी डकैतियों को अंजाम दिया।