पूर्व सारनाथ थाना प्रभारी समेत पुलिसकर्मियों को राहत, अपहरण–मारपीट व लूट के आरोप पर प्रार्थना पत्र अदालत ने किया खारिज
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा—अर्जी में पर्याप्त आधार नहीं; प्रार्थी ने पुलिस पर शाहिल को अगवा कर जान से मारने की कोशिश और 25 हजार रुपये लूटने का लगाया था आरोप
Nov 27, 2025, 22:50 IST
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वाराणसी, भदैनी मिरर। पूर्व सारनाथ थाना प्रभारी विवेक त्रिपाठी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट और 25 हजार रुपये लूटने के आरोप में दाखिल प्रार्थना पत्र को कोर्ट ने खारिज कर दिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने सुनवाई के बाद माना कि आवेदन में कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया गया। इस फैसले से संबंधित पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत मिली है।
पुलिसकर्मियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, नरेश यादव, संदीप यादव और रोहित यादव ने अदालत में पक्ष रखा।
क्या था पूरा मामला
अर्दली बाजार निवासी शहबाज खान ने अदालत में BNNS की धारा 173(4) के तहत प्रार्थना पत्र दिया था। आरोप था कि 10 मई 2025 की दोपहर 3:30 बजे तत्कालीन थाना प्रभारी सारनाथ विवेक त्रिपाठी, एसआई प्रदीप कुमार, विपक्षी एस उदय शंकर राव सहित चार अज्ञात पुलिसकर्मियों ने उसके घर काम करने वाले युवक शाहिल का अपहरण किया।



प्रार्थी के अनुसार, शाहिल उसकी बीमार मां के लिए दवा लाने गया था। उसी दौरान कार को रोककर पुलिसकर्मियों ने उसकी आंखों पर काला पट्टा बांधा और उसे अज्ञात स्थान पर ले जाकर लात–घूंसों व डंडे से पीटा। आरोप है कि शाहिल के गले में रस्सी डालकर जान से मारने का प्रयास किया गया। कार में रखे जरूरी कागजात और 25 हजार रुपये भी ले लिए गए।

थाने ले जाकर हिरासत में बैठाने का भी आरोप
प्रार्थी का कहना है कि मारपीट के बाद पुलिसकर्मियों ने शाहिल का मोबाइल छीन लिया और उसे थाने ले जाकर घंटों बैठाए रखा। कार को सीज कर चालान कर दिया गया। देर रात लगभग 11:30 बजे कथित रूप से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर शाहिल को छोड़ा गया। शाहिल ने चोटों और रस्सी के निशानों का भी हवाला दिया।

पुलिसिया कार्रवाई न होने पर कोर्ट की शरण
शहबाज खान का कहना था कि इस घटना की शिकायत पुलिस अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने माना कि प्रस्तुत अर्जी में ऐसी सामग्री नहीं है, जिस पर आगे की न्यायिक कार्यवाही जरूरी हो। इसके बाद अदालत ने प्रार्थी की अर्जी को खारिज कर दिया।
