वाराणसी में 'जामतारा' फिल्म देख बना Paytm फ्रॉड गैंग,पुलिस मुठभेड़ में 5 गिरफ्तार
रोहनिया के अवलेशपुर में दुकानदार जितेंद्र पटेल हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा; 2000 CCTV कैमरों और 50 पुलिसकर्मियों की टीम ने दबोचा
भदैनी मिरर, वाराणसी: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी के साइबर अपराध के इतिहास में एक बेहद चौंकाने वाला और खौफनाक मामला सामने आया है। रोहनिया थाना क्षेत्र के अवलेशपुर में बीते 8 जून को किराना दुकानदार जितेंद्र पटेल को गोली मारकर मौत के घाट उतारने वाले पेटीएम (Paytm) फ्रॉड गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस कमिश्नरेट की टीमों ने एक संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद गैंग के मुख्य सरगना सहित 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी उम्र महज 20 से 23 वर्ष के बीच है।


वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों (डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरी सफलता और गिरफ्तार आरोपियों का विवरण साझा किया।
'जामतारा' फिल्म और यूट्यूब वीडियो देखकर बने अपराधी
पकड़े गए आरोपियों की पहचान आयुष पटेल (21 वर्ष - मुख्य सरगना), गोलू पटेल उर्फ सुशील पटेल, अमन सेठ, मनीष सिंह और जियांशु पटेल के रूप में हुई है। पूछताछ में इन युवकों ने जो राज उगले, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। आरोपियों ने बताया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उन्होंने साइबर क्राइम पर आधारित फिल्में, यूट्यूब वीडियो और विशेषकर 'जामतारा' वेब सीरीज देखकर ठगी के पैंतरे सीखे थे।

गैंग के मुख्य सरगना आयुष पटेल ने सबसे पहले अपने ही घर में साइबर फ्रॉड का "टेस्ट" किया। जब वह सफल रहा, तो उसने अपने गांव के आसपास के दोस्तों को मिलाकर एक संगठित गैंग तैयार कर ली। यह गैंग वारदात को अंजाम देने के लिए टीवीएस रोनिन (TVS Ronin) बाइक और हुंडई औरा (Hyundai Aura) कार का इस्तेमाल करती थी। वाराणसी के अलावा इस गैंग ने कानपुर और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों में भी दर्जनों वारदातों को अंजाम दिया था।

पेटीएम के फर्जी एजेंट बनकर करते थे KYC और सिम स्वाइप फ्रॉड
डीसीपी वरुणा जोन के अनुसार, मुख्य आरोपी आयुष पटेल पूर्व में पेटीएम कंपनी में काम कर चुका था, इसलिए उसे मर्चेंट और बिजनेस अकाउंट्स की बारीकियों का पूरा आइडिया था। वह दुकानदारों के पास पेटीएम का फर्जी एजेंट बनकर पहुंचता था। वह दुकान में लगने वाले साउंड बॉक्स, केवाईसी (KYC) अपडेट करने और बिजनेस अकाउंट के चार्जेस कम कराने का झांसा देकर दुकानदारों का मोबाइल अपने हाथ में ले लेता था। इसके बाद बेहद शातिर तरीके से सिम कार्ड बदलकर (Sim Swipe) मर्चेंट अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर साइबर ठगी की जाती थी।
अकाउंट में 26 लाख का बैलेंस देख रची हत्या की साजिश
अवलेशपुर के किराना व्यवसायी जितेंद्र पटेल भी इस गैंग के निशाने पर तब आए, जब आरोपियों ने पेटीएम एजेंट बनकर उनके खाते का ट्रांजेक्शन और बैलेंस देख लिया। जितेंद्र के खाते में करीब 26 लाख रुपये का बैलेंस था और 30 लाख का लेन-देन चल रहा था। इतना बड़ा अमाउंट देखकर गैंग के मन में लालच आ गया।
उन्होंने तय किया कि जितेंद्र का मोबाइल फोन हर हाल में छीनना है। इसके लिए उन्होंने बकायदा बिहार से एक अवैध पिस्टल का इंतजाम किया और 5 महीने तक रेकी की। 8 जून को जब जितेंद्र दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तब बाइक सवार बदमाशों ने उनका मोबाइल लूटने के इरादे से उन्हें गोली मार दी। हालांकि, गोली लगने के बाद जितेंद्र घायल अवस्था में घर पहुंचे, जहां से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस हड़बड़ाहट में आरोपी मोबाइल फोन नहीं लूट पाए और खाली हाथ फरार हो गए।
3 जनपदों के 2000 CCTV कैमरे और 50 जवानों की मेहनत लाई रंग
यह मामला वाराणसी पुलिस के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण केस था। इस ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए एसओजी, सर्विलांस, साइबर सेल, रोहनिया थाना और वरुणा जोन की संयुक्त टीमों के 50 स्पेशल पुलिसकर्मियों को लगाया गया। टीम ने लगातार 20 दिनों तक वाराणसी, मिर्जापुर और चंदौली के लगभग 2,000 सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज खंगाले।
फुटेज में वारदात के समय एक टीवीएस रोनिन बाइक और उसके पीछे बैकअप दे रही हुंडई औरा कार संदिग्ध दिखाई दी। कार के नंबर से सुराग लगाते हुए पुलिस ने सबसे पहले आयुष पटेल, अमन सेठ और मनीष सिंह को हिरासत में लिया। उनकी निशानदेही पर जब पुलिस अन्य दो बदमाशों (ज्ञांशु और गोलू) को पकड़ने आखरी क्षेत्र में घेराबंदी करने पहुंची, तो बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिस की आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई (मुठभेड़) में दोनों पैर में गोली लगने से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के बाद जेल भेज दिया गया है।
भारी मात्रा में डिजिटल डिवाइस और अवैध असलहे बरामद
पुलिस ने इस गैंग के पास से साइबर अपराध और मर्चेंट फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाली भारी सामग्री जब्त की है:
| बरामद सामग्री का विवरण | संख्या / मात्रा |
|---|---|
| नकद धनराशि (क्राइम प्रोसीड्स) | ₹1,78,000 |
| स्मार्टफोन्स (Mobile Phones) | 18 |
| पेटीएम साउंड बॉक्स (Paytm Sound Boxes) | 10 |
| अवैध क्यूआर कोड (QR Codes) | 116 |
| डेबिट कार्ड (Debit Cards) | 29 |
| प्लास्टिक क्यूआर और एक्टिव सिम्स | 15 क्यूआर, 9 सिम |
| हथियार और कारतूस | 1 पिस्टल, 1 तमंचा, 3 जिंदा कारतूस |
| वाहन | 1 हुंडई औरा कार, 1 टीवीएस रोनिन बाइक |
| अन्य | 1 लैपटॉप, डोंगल, बैंक चेकबुक और पासबुक |
पुलिस के मुताबिक बरामद ₹1,78,000 की रकम भी इस गैंग द्वारा वाराणसी की ही एक ज्वेलरी शॉप में किए गए साइबर फ्रॉड से कमाई गई थी।
पूरी टीम को ₹1 लाख का इनाम
इस बेहद जटिल और संवेदनशील केस का पर्दाफाश करने वाली पूरी पुलिस टीम की सराहना करते हुए पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) महोदय द्वारा ₹1,00000 (एक लाख रुपये) के नकद पुरस्कार की घोषणा की गई है।
