वाराणसी में 20 करोड़ के ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़, कानपुर के 2 शातिर गिरफ्तार, प्रतिदिन 5 लाख का ट्रांजैक्शन
प्रतिबिंब पोर्टल की मदद से साइबर पुलिस ने जगतगंज में दी दबिश; 09 मोबाइल, 12 फर्जी सिम बरामद, 'ओम बुक' ऐप के जरिए चल रहा था सट्टेबाजी का खेल
वाराणसी (भदैनी मिरर): वाराणसी कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एक बहुत बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने जगतगंज स्थित दास नगर कॉलोनी के एक किराये के कमरे पर छापेमारी कर ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले दो शातिर सटोरियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह अब तक करीब 20 करोड़ रुपये का अवैध ट्रांजैक्शन कर चुका है।


पकड़े गए अभियुक्तों के कब्जे से 09 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 12 सक्रिय सिम कार्ड (कुल लगभग 30 सिम कार्ड्स का लिंक) और एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं।
प्रतिबिंब पोर्टल पर ₹2000 के फ्रॉड से खुला 20 करोड़ का राज
एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना ने मामले का विवरण देते हुए बताया कि पुलिस के 'प्रतिबिंब पोर्टल' (जो साइबर अपराधियों की जीआईएस बेस्ड लाइव लोकेशन दिखाता है) पर एक संदिग्ध मोबाइल नंबर फ्लैश हुआ। इस नंबर के खिलाफ इंस्टाग्राम आईडी हैक कर क्यूआर कोड से ₹2,000 की ठगी करने की शिकायत दर्ज थी।

जब साइबर थाने के इंस्पेक्टर विजय नारायण मिश्र और उनकी संयुक्त टीम ने इस पैसे के रूट और नंबर की जांच की, तो पता चला कि यह पैसा एक बड़े ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट के खाते में जा रहा था। तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस ने जगतगंज के कमरे में दबिश देकर दोनों आरोपियों को धर दबोचा।

गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
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दीपक सिंह (उम्र 22 वर्ष), पुत्र राम बाबू वर्मा, निवासी: ए-ब्लॉक ग्राइज, गोविंद नगर, रतनलाल नगर, जनपद कानपुर नगर।
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नवनीत सिंह (उम्र 25 वर्ष), पुत्र राम कमल सिंह, निवासी: एमएल-267, बर्रा-05, थाना बर्रा, जनपद कानपुर नगर।
क्या था अपराध करने का तरीका (Modus Operandi)?
पूछताछ में आरोपियों ने कुबूल किया कि वे 'ओम बुक' (Om Book) नामक ऑनलाइन बेटिंग ऐप का पूरा मॉड्यूल वाराणसी से ऑपरेट कर रहे थे। बरामद मोबाइलों से इसके एडमिन और कंसोल कंट्रोल्स मिले हैं।
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सोशल मीडिया पर विज्ञापन: ये लोग सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर आकर्षक डिजिटल फ्लायर और एड्स चलाते थे।
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व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप: विज्ञापन पर क्लिक करते ही यूजर इनके ग्रुप्स से जुड़ जाता था, जहां उन्हें सट्टेबाजी का लिंक और बेटिंग आईडी-पासवर्ड दिया जाता था।
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खेलों पर सट्टा: इसके जरिए आईपीएल (IPL), फुटबॉल और विभिन्न खेलों पर ऑनलाइन सट्टा खिलाया जाता था।
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म्यूल अकाउंट्स का खेल: पैसे जमा कराने (Pay-In) और जीतने पर भुगतान (Pay-Out) के लिए ये दूसरों के नाम पर खुले फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) और मर्चेंट क्यूआर कोड का इस्तेमाल करते थे।
मनी लॉन्ड्रिंग का नया पैंतरा: सट्टेबाजी से सफेद होता था ठगी का धन
एसीपी क्राइम ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि साइबर अपराधी अब ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल 'लेयरिंग' (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए कर रहे हैं। साइबर ठग जब किसी आम नागरिक से ठगी करते हैं, तो वे पीड़ित को सीधे इन सट्टा ऐप्स का क्यूआर कोड भेज देते हैं। पैसा सीधे सट्टा किंग के खातों में जाता है, जहां से इसे गेमिंग और विड्रॉल के नाम पर आसानी से निकाल लिया जाता है। इससे पुलिस के लिए मुख्य ठग तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
50 बैंक खाते रडार पर, 4 खाते हुए फ्रीज
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क पिछले एक साल से सक्रिय था। इनके पास से मिले डेटा के अनुसार, ये रोजाना करीब 5 लाख रुपये का डिपॉजिट करवाते थे। पुलिस को इनके 50 से अधिक बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें से 4 खातों को तुरंत फ्रीज कर ₹5 लाख की रकम को ब्लॉक कर दिया गया है।
आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 112(2) और 3/4 सार्वजनिक जुआ अधिनियम (Public Gambling Act) तथा ऑनलाइन गेमिंग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरोह के अन्य साथियों— प्रवीन उर्फ अक्षय और दिलावर की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
