माउंट एवरेस्ट पर बड़ा घोटाला: विदेशी पर्वतारोहियों को नशा देकर कराई जा रही थी फर्जी रेस्क्यू
नेपाल पुलिस की जांच में ₹160 करोड़ से ज्यादा का इंश्योरेंस फ्रॉड उजागर, 32 पर केस, 11 गिरफ्तार
काठमांडू
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी
Mount Everest
पर एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। नेपाल पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ गाइड और रेस्क्यू ऑपरेटर विदेशी पर्वतारोहियों को जानबूझकर बीमार बनाकर महंगे हेलीकॉप्टर रेस्क्यू करवा रहे थे, ताकि बीमा कंपनियों से मोटी रकम वसूली जा सके।


₹160 करोड़ का इंश्योरेंस फ्रॉड
Nepal Police की जांच के अनुसार, यह घोटाला करीब 20 मिलियन डॉलर (लगभग ₹160 करोड़) का है।
इस मामले में अब तक 32 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जबकि 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
हजारों पर्यटक प्रभावित
जांच में सामने आया है कि 2022 से 2025 के बीच इस रैकेट ने 4,782 विदेशी पर्वतारोहियों को प्रभावित किया।
पुलिस ने 300 से अधिक फर्जी रेस्क्यू मामलों का खुलासा किया है, जिनमें पर्यटकों और बीमा कंपनियों से भारी रकम वसूली गई।

कैसे किया जाता था घोटाला?
जांचकर्ताओं के मुताबिक, गाइड और ऑपरेटर पर्वतारोहियों को बीमार दिखाने के लिए खतरनाक तरीके अपनाते थे—
- खाने में बेकिंग पाउडर मिलाकर पेट खराब करना
- जरूरत से ज्यादा दवाएं और पानी देना
- नकली मेडिकल इमरजेंसी का बहाना बनाना
इसके बाद जब पर्यटक उल्टी, चक्कर या कमजोरी की शिकायत करते, तो उन्हें तुरंत नीचे उतरने और हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए राजी किया जाता।
फर्जी हेलीकॉप्टर रेस्क्यू का खेल
रेस्क्यू के नाम पर ऑपरेटर:

- एक ही हेलीकॉप्टर में कई लोगों को ले जाकर अलग-अलग बिल बनाते थे
- फर्जी फ्लाइट रिकॉर्ड तैयार करते थे
- अस्पतालों से नकली एडमिशन और इलाज के दस्तावेज बनवाते थे
कुछ मामलों में तो ऐसे पर्यटकों के नाम पर भी बिल बनाए गए, जो अस्पताल में भर्ती ही नहीं हुए थे।
कई स्तरों पर शामिल लोग
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे रैकेट में—
- शेरपा गाइड
- ट्रैकिंग कंपनी मालिक
- हेलीकॉप्टर ऑपरेटर
- अस्पताल के अधिकारी
सभी की मिलीभगत थी।
पहली गिरफ्तारी और जांच
इस मामले में 25 जनवरी को रेस्क्यू कंपनियों के 6 ऑपरेटर और मैनेजर सबसे पहले गिरफ्तार किए गए थे।
मामले की जांच
Central Investigation Bureau द्वारा की जा रही है।
देश की छवि पर असर
नेपाल पुलिस ने कहा है कि इस घोटाले से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि, प्रतिष्ठा और पर्यटन उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब 30 मार्च से एवरेस्ट का नया क्लाइम्बिंग सीजन शुरू हुआ है।
सख्ती बढ़ने के संकेत
इस खुलासे के बाद नेपाल सरकार और प्रशासन ने ट्रैकिंग और रेस्क्यू ऑपरेशंस पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है। आने वाले समय में इस तरह के फर्जीवाड़े पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
