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Mainpuri: मदरसा गईं दो मासूम चचेरी बहनों के शव सेप्टिक टैंक से बरामद

दिनभर ढूंढते रहे परिजन, देर शाम घर के बाहर खुले पड़े टैंक में उतराते मिले शव; कोहराम के बीच परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से किया इनकार।

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क्राइम डेस्क, भदैनी मिरर: उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के औंछा थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां गांव नगला कंचन में मस्जिद के मदरसे से पढ़ने गई दो सगी चचेरी बहनें अचानक लापता हो गईं और देर शाम उनके शव घर के ठीक बाहर बने एक खुले सेप्टिक टैंक से बरामद किए गए। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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मदरसे से निकलने के बाद अचानक हो गईं लापता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगला कंचन निवासी इम्तियाज की 6 वर्षीय पुत्री साहिबा और जाकिर हुसैन की 5 वर्षीय पुत्री गुलिस्तां बृहस्पतिवार की सुबह गांव की ही मस्जिद में स्थित मदरसे में पढ़ने गई थीं। दोनों आपस में चचेरी बहनें थीं। सुबह करीब 10:00 बजे मदरसा बंद होने के बाद दोनों बच्चियां घर के लिए निकलीं, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वे घर नहीं पहुंचीं, तो परिजनों को चिंता हुई।

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परिजनों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर तुरंत बच्चियों की खोजबीन शुरू की। पूरे दिन गांव और आसपास के इलाकों में खाक छानने के बाद भी दोनों मासूमों का कहीं कोई सुराग नहीं मिला।

शाम को सेप्टिक टैंक में उतराते मिले शव

दिनभर की सघन तलाशी के बाद, देर शाम करीब साढ़े सात बजे जाकिर हुसैन के घर के बाहर बने सेप्टिक टैंक में दोनों बच्चियों के शव उतराते हुए दिखाई दिए। शवों को देखते ही चीख-पुकार मच गई और ग्रामीणों ने तुरंत दोनों बच्चियों को टैंक से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

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सूचना मिलते ही औंछा थाना इंस्पेक्टर चंद्रपाल सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का मुआयना किया। हालांकि, पुलिस के काफी समझाने और कानूनी प्रक्रिया का हवाला देने के बावजूद पीड़ित परिवार ने दोनों बच्चियों का पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया।

साजिश या हादसा? दो दिन पहले ही खुला था मौत का टैंक

यह घटना एक सोची-समझी साजिश है या महज एक दर्दनाक हादसा, इसे लेकर पुलिस तहकीकात कर रही है। हालांकि, जमीनी हकीकत पर गौर करें तो यह लापरवाही के कारण हुआ एक बड़ा हादसा प्रतीत होता है।

दरअसल, गुलिस्तां के पिता जाकिर हुसैन ने करीब दो साल पहले इस शौचालय के टैंक का निर्माण कराया था और तब से इसे पूरी तरह ढककर रखा गया था। लेकिन दो दिन पहले ही शौचालय को पूरी तरह चालू करने के उद्देश्य से उसकी सफाई के लिए टैंक के ढक्कन को खोला गया था। सफाई के बाद इसे दोबारा बंद किया जाना था, लेकिन उससे पहले ही दोनों मासूम बच्चियां खेलते समय या आते-जाते वक्त इस गहरे और पानी से भरे टैंक का शिकार हो गईं। पुलिस का कहना है कि परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।