₹1100 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट बेनकाब, लुधियाना का युवक समेत 6 भारतीय गिरफ्तार
कंबोडिया से संचालित चीनी गैंग, मलेशियाई मास्टरमाइंड और भारत में फर्जी सिम नेटवर्क के जरिए 32 राज्यों में ठगी
जोधपुर/श्रीगंगानगर। भारत में अब तक के सबसे बड़े साइबर अपराध मामलों में से एक का खुलासा हुआ है। राजस्थान पुलिस ने ₹1100 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए लुधियाना निवासी संदीप भट्ट समेत 6 भारतीयों को गिरफ्तार किया है। यह रैकेट कंबोडिया से संचालित चीनी कॉल सेंटर्स के जरिए देशभर में लोगों को ठग रहा था।


गिरफ्तार आरोपियों में प्रकाश भील, हेमंत पंवार, राम अवतार राठी, हरीश मालाकार और मोहम्मद शरीफ शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के पीछे चार मलेशियाई नागरिक - ली जियान हुई, लो दी खेन, चिन यू मिंग और लियोंग केन नाथ मास्टरमाइंड हैं, जिनके खिलाफ **लुकआउट सर्कुलर** जारी किया गया है।

कैसे हुआ खुलासा
इस बड़े रैकेट का खुलासा जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश की अगुवाई में हुई जांच के दौरान हुआ। जांच की कड़ी तब खुली जब तेलंगाना के एक व्यक्ति से ₹8.9 करोड़ की ठगी एक ऐसे सिम कार्ड से की गई, जो बरकत खान के नाम पर जारी था, जबकि उसे इस सिम के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब श्रीगंगानगर साइबर पुलिस को सौंप दी गई है, क्योंकि इस रैकेट के तार जिले से जुड़े पाए गए।
फर्जी सिम का खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि अनूपगढ़ (सीमावर्ती इलाका) में तीन केंद्रों से हजारों फर्जी सिम कार्ड जारी किए गए। आरोपी सुनील कुमार ने इन सिम कार्डों को कंबोडिया भेजा, जहां इनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया गया।
अब तक 5000 से ज्यादा फर्जी सिम और व्हाट्सएप अकाउंट ब्लॉक किए जा चुके हैं।
कंबोडिया में कॉल सेंटर्स, चीनी गैंग का नियंत्रण
पुलिस के अनुसार, यह पूरा ऑपरेशन चीनी साइबर गैंग द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो कंबोडिया में बड़े-बड़े कॉल सेंटर्स चला रहे थे। इन कॉल सेंटर्स में भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के करीब 1000 से 1500 लोग काम कर रहे थे।
भारतीय युवाओं को वियतनाम और कंबोडिया में नौकरी का झांसा देकर बुलाया जाता था। वहां पहुंचते ही उनके दस्तावेज जब्त कर लिए जाते और 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद जबरन साइबर ठगी करवाई जाती थी।
निवेश, ट्रेडिंग और फर्जी ऐप्स से ठगी
साइबर ठगी के लिए निवेश योजनाएं, ट्रेडिंग फ्रॉड और फर्जी ऐप्स का इस्तेमाल किया जाता था। Indian Cyber Crime Coordination Center (I4C) की रिवर्स ट्रैकिंग में सामने आया कि
- सितंबर से नवंबर 2025 के बीच
- 2.3 लाख संदिग्ध नंबरों में से 36 हजार भारतीय सिम
- कंबोडिया में सक्रिय पाए गए
- जिससे 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ₹1100 करोड़ की ठगी हुई।
डार्क वेब से होती थी बातचीत
गिरफ्तार आरोपी प्रकाश भील ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह और उसके साथी -मोहम्मद शरीफ, संदीप भट्ट, हेमंत पंवार, राम अवतार, राहुल कुमार झा, रुस्तम खान, हरीश मालाकार, विनायक मोबाइल मकराना और रविंदर बिश्नोई -मलेशियाई नागरिकों को फर्जी सिम उपलब्ध कराते थे।
बताया गया कि राहुल कुमार झा को भुगतान मिलता था और वही सिम कार्ड विदेश भेजता था। गिरोह आपस में डार्क वेब के जरिए संपर्क में रहता था ताकि सुरक्षा एजेंसियों से बचा जा सके।
राजस्थान पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों, विदेशी कनेक्शन और मनी ट्रेल की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
