गोरखपुर में नकली नोट छापने वाले हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़: 500 के एक असली नोट के बदले देते थे 4 नकली नोट, वकील समेत 5 गिरफ्तार
सरस्वतीपुरम कॉलोनी में चल रही थी नोटों की 'फैक्ट्री', बिहार के मास्टरमाइंड से जुड़े तार
गोरखपुर (भदैनी मिरर): उत्तर प्रदेश की गोरखपुर पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए पादरी बाजार क्षेत्र में चल रहे नकली नोट छापने वाले एक हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह बाजार में 500 रुपये के एक असली नोट के बदले 4 नकली नोट खपाने का धंधा कर रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान मौके से कोर्ट के एक अधिवक्ता और मेडिकल स्टोर संचालक सहित पांच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से भारी मात्रा में छपे हुए नकली नोट, नोट छापने के उपकरण और कच्चा माल बरामद किया गया है।


मुखबिर की सूचना पर पुलिस और SOG की संयुक्त छापेमारी
एसपी सिटी निमिष पाटिल और सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गुलरिहा थाना पुलिस संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की चेकिंग कर रही थी, तभी मुखबिर से एक पुख्ता सूचना मिली। सूचना के मुताबिक, शाहपुर थाना क्षेत्र के पादरी बाजार स्थित सरस्वतीपुरम कॉलोनी की एक शटरनुमा दुकान में नकली नोट छापने का काम धड़ल्ले से चल रहा है।

गुलरिहा पुलिस ने तत्काल एसओजी (SOG) और सर्विलांस सेल की टीम को साथ लेकर मौके पर घेराबंदी की और जाली नोट बनाने में शामिल पांचों आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की हुई पहचान, सभी हैं पढ़े-लिखे
पकड़े गए आरोपियों में चार गोरखपुर के और एक कुशीनगर का रहने वाला है। खास बात यह है कि सभी आरोपी पढ़े-लिखे और पेशेवर हैं:

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मोहित कुमार पासवान (निवासी विकास नगर) - सिविल कोर्ट में अधिवक्ता है।
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आकाश सिंह (निवासी भलूई, अहिरौली, कुशीनगर) - मेडिकल स्टोर चलाता है।
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विशाल शर्मा (निवासी पादरी बाजार) - खुद का प्रिंटिंग प्रेस चलाता है।
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आशीष शर्मा (निवासी पादरी बाजार) - प्रिंटिंग प्रेस में काम करता है।
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करन सिंह (निवासी न्यू क्रिश्चियन कॉलोनी, पादरी बाजार) - गिरोह का सक्रिय सदस्य।
इस मामले में बिहार के भी दो सप्लायरों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें पुलिस ने केस में आरोपी बनाते हुए उनकी तलाश शुरू कर दी है।
बिहार से लाए थे 40 लाख के 'काले नोट', केमिकल का खेल
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे सभी आपस में दोस्त हैं और जल्द अमीर बनना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने 10 लाख रुपये इकट्ठा किए और बिहार के शातिरों से संपर्क कर वहां से 40 लाख रुपये के काले रंग के नकली नोट खरीद लाए। बिहार के सप्लायरों ने उन्हें झांसा दिया था कि एक खास केमिकल डालने पर ये काले नोट बिल्कुल असली नोट जैसे दिखने लगेंगे, लेकिन उन्होंने केमिकल नहीं दिया।
झांसे का शिकार होने के बाद आरोपियों ने खुद ही गोरखपुर में सेटअप लगाया। विशाल के प्रिंटिंग प्रेस के अनुभव का फायदा उठाकर उन्होंने दुकान में कंप्यूटर और स्कैनर-प्रिंटर की मदद से हूबहू नकली नोट छापना शुरू कर दिया।
छापेमारी में बरामद हुआ यह सामान
पुलिस को मौके से भारी मात्रा में जाली नोट और उन्हें तैयार करने की सामग्री मिली है:
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500 रुपये के 10 और 100 रुपये का 1 नकली नोट।
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4 एंड्रॉइड मोबाइल और 1 आईफोन।
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मॉनिटर, सीपीयू, कीबोर्ड, माउस और 2 हाई-टेक प्रिंटर।
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4 कलर इंक के डिब्बे और ए-4 साइज के विशेष पेपर।
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49 विभिन्न प्रकार के प्रिंटेड ए-4 साइज के नकली नोटों के फर्मा।
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14 दोनों तरफ से प्रिंट किए गए नकली नोट।
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नोटों के बीच में लगने वाला सुरक्षा तार (Security Thread)।
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महात्मा गांधी की फोटो वाले 04 विशेष फर्मा।
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39 गड्डी काले रंग के 500 रुपये के आकार के सादे और प्रिंटेड कागज।
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ सुसंगत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है और गिरोह के नेटवर्क को पूरी तरह से खंगालने में जुटी है।
