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BLW का फर्जी अधिकारी बनकर ठगी, बरेका में स्क्रैप टेंडर दिलाने के नाम पर खेल; दो पर मुकदमा

जालसाज ने बीएलडब्ल्यू अधिकारी का जाली आईकार्ड और टेंडर के फर्जी दस्तावेज दिखाकर अधिवक्ता को झांसे में लिया

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बरेका में स्क्रैप का टेंडर दिलाने के नाम पर 15 लाख की मांग की गई थी, जिसके एवज में एडवांस रकम ऐंठी

कोर्ट के आदेश पर सारनाथ पुलिस ने दो नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है

वाराणसी (कार्यालय संवाददाता): धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में जालसाजों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे खुद को केंद्रीय प्रतिष्ठानों का बड़ा अधिकारी बताकर रसूखदार लोगों को भी अपना शिकार बना रहे हैं। ताजा मामला वाराणसी के बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका/BLW) से जुड़ा है, जहां का फर्जी अधिकारी बनकर एक अधिवक्ता से स्क्रैप वर्क टेंडर दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया है। इस मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सारनाथ पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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जानकारी के अनुसार, सारनाथ थाना क्षेत्र के लोहिया नगर फेज-2 (हवेलिया) के रहने वाले अधिवक्ता विवेक चौबे ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। पीड़ित अधिवक्ता ने बताया कि भेलूपुर निवासी आकर्ष जायसवाल ने उनकी मुलाकात भगवानपुर (लंका) के रहने वाले सुमित कुमार त्रिपाठी नाम के व्यक्ति से कराई थी। आकर्ष ने सुमित को बीएलडब्ल्यू का एक रसूखदार अधिकारी बताया था।

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फर्जी आईकार्ड और कागजात दिखाकर जीता भरोसा

पीड़ित को पूरी तरह अपने जाल में फंसाने के लिए सुमित कुमार त्रिपाठी ने बकायदा बीएलडब्ल्यू अधिकारी का एक फर्जी पहचान पत्र (ID Card) दिखाया। इतना ही नहीं, उसने बरेका में होने वाले स्क्रैप वर्क टेंडर से जुड़े कई कूटरचित (फर्जी) सरकारी दस्तावेज भी दिखाए। इन नकली कागजातों के दम पर आरोपियों ने विवेक चौबे को बरेका में स्क्रैप का बड़ा टेंडर दिलाने का झांसा दिया और इसके बदले में 15 लाख रुपये की मांग की।

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ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज

आरोपियों के झांसे में आकर अधिवक्ता विवेक चौबे ने शुरुआत में उन्हें एडवांस के तौर पर 2.50 लाख रुपये दे दिए। लेकिन जब काफी समय बीत जाने के बाद भी टेंडर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी, तो पीड़ित को शक हुआ। शक होने पर जब विवेक चौबे खुद बरेका (BLW) कार्यालय पहुंचे और वहां छानबीन की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पता चला कि सुमित कुमार त्रिपाठी नाम का कोई भी व्यक्ति बीएलडब्ल्यू में कार्यरत ही नहीं है और जो दस्तावेज दिखाए गए थे, वे सभी पूरी तरह फर्जी थे।

रुपये मांगने पर मिली जान से मारने की धमकी ठगी का अहसास होने पर जब पीड़ित ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्होंने काफी टालमटोल के बाद महज 23 हजार रुपये वापस किए। बाकी बचे 2.27 लाख रुपये लौटाने से आरोपियों ने साफ इनकार कर दिया और दबाव बनाने पर पीड़ित अधिवक्ता को जान से मारने की धमकी देने लगे। इसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए पुलिस अधिकारियों और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सारनाथ पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

अदालत के कड़े रुख के बाद सारनाथ पुलिस ने मुख्य आरोपी सुमित कुमार त्रिपाठी और आकर्ष जायसवाल के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की कड़ाई से जांच की जा रही है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।