EPF पर 8.25% ब्याज का पैसा खाते में कब आएगा? केंद्र सरकार ने लागू की नई व्यवस्था, अब 7 दिनों में ट्रांसफर होगी रकम
EPFO ने पेश की 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026'; आंशिक निकासी के नियम हुए बेहद आसान, डिजिटल KYC होगी अनिवार्य
बिजनेस डेस्क : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों नौकरीपेशा सदस्यों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने सालों पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF स्कीम)-2026' को मंजूरी दे दी है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा इसकी अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह नई योजना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। यह नई व्यवस्था साल 1952 से चली आ रही पुरानी ईपीएफ योजना की जगह लेगी।


इस नई योजना के लागू होने के बाद ईपीएफ से जुड़ी तमाम सेवाएं न सिर्फ पूरी तरह डिजिटल हो जाएंगी, बल्कि ब्याज का पैसा खातों में आने के लिए अब महीनों का लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।
मंजूरी के एक सप्ताह के भीतर आएगा ब्याज का पैसा
नौकरीपेशा कर्मचारियों का सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि घोषित ब्याज की राशि उनके पीएफ खाते में कब क्रेडिट होगी। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ पर 8.25 प्रतिशत ब्याज देने का फैसला पहले ही ले लिया है। अब नई व्यवस्था के तहत जैसे ही ब्याज दरों को अंतिम मंजूरी मिलेगी, उसके महज एक सप्ताह (7 दिन) के भीतर ब्याज की पूरी राशि सीधे कर्मचारियों के खातों में भेज दी जाएगी।

पैसे निकालना हुआ बेहद आसान और तेज
नई ईपीएफ योजना-2026 में खाताधारकों की जरूरतों का विशेष ख्याल रखा गया है। इसके तहत खाते से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) के नियमों को काफी सरल और लचीला बनाया गया है। अब बीमारी के इलाज, बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी-ब्याह या अन्य किसी आकस्मिक जरूरत के लिए पीएफ खाते से एडवांस पैसा निकालना पहले के मुकाबले बहुत आसान और तेज हो जाएगा।

डिजिटल KYC अब जरूरी, क्लेम सेटलमेंट में आएगी तेजी
ईपीएफओ अपनी सेवाओं को 100% पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। नई व्यवस्था के तहत सभी खाताधारकों के लिए जरूरी दस्तावेजों के जरिए डिजिटल KYC कराना अनिवार्य कर दिया गया है। डिजिटल सत्यापन होने से भविष्य में क्लेम सेटलमेंट, ट्रांसफर और विड्रॉल जैसी प्रक्रियाएं बिना किसी रुकावट के बहुत तेजी से पूरी हो सकेंगी।
इन नियमों में नहीं हुआ कोई बदलाव
-
12% अंशदान का नियम रहेगा जारी: नई योजना में बेसिक सैलरी से कटने वाले पीएफ योगदान में कोई बदलाव नहीं है। कर्मचारी और नियोक्ता (कंपनी) दोनों की ओर से किया जाने वाला 12-12 प्रतिशत ईपीएफ अंशदान का मौजूदा नियम आगे भी बरकरार रहेगा।
-
हाइयर पेंशन का विकल्प: अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए राहत की बात है कि उन्हें तय नियमों और शर्तों के तहत उच्च पेंशन (Higher Pension) चुनने की सुविधा का विकल्प मिलता रहेगा।
डिफॉल्टर कंपनियों पर कसेगा शिकंजा
नई स्कीम में कंपनियों और संस्थानों की जवाबदेही को और कड़ा कर दिया गया है। अब सभी नियोक्ताओं के लिए अपने कर्मचारियों का ईपीएफ अंशदान समय पर सरकारी खाते में जमा कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई कंपनी नियमों का उल्लंघन करती है या पीएफ का पैसा रोकने की कोशिश करती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
