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अमेरिका-ईरान जंग का असर: MCX पर सोना ₹5,811 उछला, चांदी ₹9,492 चढ़ी; तेल और डॉलर में भी तूफानी तेजी
 

ईरान–इजरायल–अमेरिका टकराव के बीच निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाने के तौर पर सोने-चांदी का रुख किया, वैश्विक बाजार में भी रिकॉर्ड स्तर के आसपास दाम
 

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बिजनेस,भदैनी मिरर। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर कमोडिटी बाजार पर देखने को मिल रहा है। सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशकों के रुख के चलते सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है।

MCX पर सोना-चांदी में तेज उछाल

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मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह 9:45 बजे अप्रैल 2026 डिलीवरी वाला सोना वायदा ₹5,811 यानी करीब 3.5% बढ़कर ₹1,67,915 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले सुबह 9:20 बजे यह ₹1,65,501 पर खुला था, जबकि पिछला बंद भाव ₹1,62,104 था।

वहीं 5 मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी ₹9,492 यानी 3.5% की तेजी के साथ ₹2,84,490 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। सुबह इसका ओपनिंग रेट ₹2,82,644 रहा।

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वैश्विक बाजार में भी रिकॉर्ड के करीब सोना

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। सिंगापुर ट्रेडिंग के दौरान सोना करीब 1.9% मजबूत होकर 5,380 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। चांदी में 2.4% की तेजी दर्ज की गई और यह 96 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गई।

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बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह ही कीमती धातुओं में 3% से अधिक मजबूती आई थी और सप्ताहांत में हालात और बिगड़ने से बाजार में घबराहट बढ़ गई।

तनाव क्यों बढ़ा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में तेहरान ने इजरायल के अलावा खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम एशिया में अस्थिरता चरम पर पहुंच गई है।

ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei से जुड़ी खबरों ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है।

सोने की तेजी के बड़े कारण

विश्लेषकों के अनुसार, सोने की इस रैली के पीछे सिर्फ ताजा सैन्य टकराव नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा भू-राजनीतिक तनाव भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की आक्रामक विदेश नीति, वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीद और निवेशकों का बॉन्ड व करेंसी से हटकर सुरक्षित एसेट की ओर झुकाव – ये सभी कारक तेजी को सपोर्ट कर रहे हैं।

फरवरी में सोने ने लगातार सातवां महीना बढ़त के साथ बंद किया, जो 1973 के बाद का सबसे लंबा मासिक उछाल माना जा रहा है। हालांकि जनवरी के अंत में 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से थोड़ी गिरावट आई थी, लेकिन इस साल अब तक सोना लगभग 25% रिटर्न दे चुका है।


तेल और डॉलर में भी उछाल

ईरान-इजरायल तनाव का असर कच्चे तेल पर भी पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते सप्लाई बाधित होने की आशंका से तेल कीमतों में चार साल की सबसे बड़ी छलांग दर्ज की गई।

डॉलर इंडेक्स में भी करीब 0.4% की बढ़त देखी गई। आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर सोना दबाव में आता है, लेकिन इस बार दोनों में साथ-साथ तेजी दिख रही है, जो असाधारण परिस्थिति की ओर इशारा करती है।

निवेशकों के लिए संकेत

कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव के साथ मजबूती बनी रह सकती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा दौर में सोना फिर से “सुरक्षित निवेश” की पहली पसंद बन गया है। हालांकि निवेशकों को ऊंचे स्तर पर खरीदारी से पहले जोखिम का आकलन जरूर करना चाहिए।
 

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