US-Iran War: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा एलान 'ईरान से संघर्ष विराम खत्म', अमेरिका के नए हमलों से क्या भारत में बढ़ेगी महंगाई?
अमेरिका ने ईरान के 90 ठिकानों पर किया हवाई हमला; कच्चे तेल की कीमतों में आया तगड़ा उछाल
ग्लोबल डेस्क (भदैनी मिरर): पश्चिम एशिया (West Asia) से एक बार फिर बड़े युद्ध की आहट आ रही है, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा है कि "ईरान के साथ संघर्ष विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।"


इस एलान के ठीक बाद अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान के तटीय प्रांतों और होर्मुजगन क्षेत्र में करीब 90 ठिकानों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक की है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इस नए घटनाक्रम से वैश्विक बाजार थर्रा गया है और भारत के लिए भी यह बड़ी चेतावनी है।

कच्चे तेल और गैस की कीमतों में लगी आग
ट्रंप के इस आक्रामक बयान और सैन्य कार्रवाई का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर देखने को मिला है।
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क्रूड ऑयल की उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमतें झटके में 8 फीसदी बढ़कर $80.12 प्रति बैरल के पार चली गईं, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) भी 4.4 प्रतिशत मजबूत होकर $73.52 पर पहुंच गया।
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भारत पर असर: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (Crude Oil) के लिए बहुत हद तक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जलमार्ग पर निर्भर है। संघर्ष शुरू होने से पहले भारत अपनी जरूरत का 40% कच्चा तेल और लगभग 60% एलएनजी (LNG) इसी रास्ते से आयात करता था। यदि यह जलमार्ग बाधित होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
महंगाई की दोहरी मार और घरेलू बाजार पर संकट
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, यदि खाड़ी देशों में युद्ध दोबारा भड़कता है, तो भारत में घरेलू महंगाई दर (Inflation) तेजी से बढ़ेगी। तेल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और रोजमर्रा के राशन पर पड़ेगा। इसके अलावा प्लास्टिक पैकेजिंग, साबुन और क्रीम बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी।

दूसरी तरफ, वैश्विक बाजारों में आई गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है। तनाव कम होने के बाद भारत में करीब 50 अरब डॉलर के जो नए आईपीओ (IPOs) बाजार में आने वाले थे, अब उन पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
ईरान से तेल आयात की योजना अधर में
जून महीने में जब अमेरिका और ईरान के बीच एमओयू (MoU) हुआ था, तब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान पर से प्रतिबंध हटाए थे। भारत भी ईरान से दोबारा सस्ता तेल खरीदने की योजना पर विचार कर रहा था और रिफाइनरियां बातचीत के दौर में थीं। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के इस सख्त रुख के बाद भारत की ये योजनाएं फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती दिख रही हैं, क्योंकि भारत प्रतिबंधित देशों से तेल आयात नहीं करता है।
चाबहार और उसके आसपास के इलाकों में हुए धमाकों और बिजली कटौती की खबरों के बीच भारतीय रक्षा और विदेश मंत्रालय भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। भारत उम्मीद कर रहा है कि यह केवल अमेरिकी दबाव की रणनीति (Pressure Tactic) हो और मामला पूर्ण युद्ध में तब्दील न हो।
