Tech Crash: टेक दिग्गज IBM के शेयरों में 23% की भारी गिरावट, दूसरी तिमाही के नतीजों ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
सीईओ अरविंद कृष्णा ने सॉफ्टवेयर बिजनेस में कमजोरी को बताया वजह; एआई (AI) के बढ़ते दौर में कंपनियों के खर्च बदलने से दिग्गज टेक कंपनी को हुआ भारी नुकसान।
ग्लोबल डेस्क (भदैनी मिरर): वैश्विक टेक जगत की दिग्गज कंपनी इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स (IBM) के लिए मंगलवार का दिन बेहद निराशाजनक रहा। वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2) के शुरुआती अनुमानित नतीजों के जारी होने के बाद अमेरिकी बाजार में आईबीएम के शेयरों में 23 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे के आंकड़े विश्लेषकों और बाजार विशेषज्ञों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए, जिसके बाद निवेशकों में बिकवाली की होड़ मच गई।


फैक्टसेट (FactSet) के आंकड़ों के मुताबिक, आईबीएम ने 17.2 बिलियन डॉलर के राजस्व (Revenue) पर 2.93 डॉलर प्रति शेयर की समायोजित कमाई (Adjusted Earnings) दर्ज की है। जबकि बाजार विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि कंपनी कम से कम 17.86 बिलियन डॉलर का राजस्व और 3.01 डॉलर प्रति शेयर की कमाई हासिल करेगी।

सीईओ अरविंद कृष्णा ने बताई गिरावट की वजह
आईबीएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अरविंद कृष्णा ने निवेशकों और बाजार को संबोधित करते हुए इस गिरावट और कमजोर प्रदर्शन के पीछे की वजहों को स्पष्ट किया है। उन्होंने सॉफ्टवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में आई सुस्ती को इस गिरावट का जिम्मेदार ठहराया।

अरविंद कृष्णा ने आईबीएम के निवेशकों को लिखे एक पत्र में कहा:
"जून के आखिरी कुछ हफ्तों में, हमारे ग्राहकों ने अपनी तिमाही पूंजीगत खर्च (Capex) का रुख सॉफ्टवेयर के बजाय सर्वर, स्टोरेज और मेमोरी चिप्स जैसे हार्डवेयर की खरीदारी की तरफ मोड़ दिया। ग्राहकों को डर था कि आने वाले समय में इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई चेन में दिक्कत आ सकती है। हालांकि हमें सप्लाई चेन से जुड़े कुछ असर का अनुमान था, लेकिन ग्राहकों द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में खर्च की प्राथमिकताओं को बदल दिया जाएगा, इसका अंदाजा हमें नहीं था।"
उन्होंने आत्ममंथन करते हुए आगे कहा, "इन विपरीत परिस्थितियों में हमारी टीम को पूरी सटीकता के साथ काम करने की जरूरत थी, लेकिन इस तिमाही में हम चूक गए। हम बदलती परिस्थितियों के हिसाब से खुद को तेजी से नहीं ढाल पाए, जिसके कारण कई बड़े सौदे तय समय पर पूरे नहीं हो सके और यही हमारे राजस्व में आई कमी की मुख्य वजह बनी।"
AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का डर और बदलता बाजार
विशेषज्ञों का मानना है कि आईबीएम के शेयरों में आई यह बड़ी गिरावट उस डर को और पुख्ता करती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स के तेजी से बढ़ते चलन के कारण दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों का बिजनेस मॉडल प्रभावित हो रहा है।
इस समय बाजार में सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस से ज्यादा मांग एआई डेटा और प्रोसेसिंग को संभालने वाले हार्डवेयर की है। यही वजह है कि माइक्रोन (Micron) और एसके हाइनिक्स (SK Hynix) जैसी मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनियों को एआई बूम का सबसे ज्यादा फायदा मिल रहा है, जबकि ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर और कंसल्टिंग प्रोवाइडर कंपनियों जैसे आईबीएम को संघर्ष करना पड़ रहा है।
पहली तिमाही में रहा था मजबूत प्रदर्शन
दिलचस्प बात यह है कि इससे पिछली यानी पहली तिमाही में आईबीएम का प्रदर्शन काफी शानदार था। पहली तिमाही में कंपनी का सॉफ्टवेयर रेवेन्यू 11% बढ़कर 7.05 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया था। तब कंपनी ने $1.81 के अनुमान के मुकाबले $1.91 प्रति शेयर की मजबूत कमाई दर्ज की थी और कुल रेवेन्यू भी अनुमानित $15.62 बिलियन से अधिक $15.92 बिलियन रहा था। लेकिन दूसरी तिमाही के इन शुरुआती झटकों ने टेक बाजार में आईबीएम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
