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Rupee Record Low: डॉलर के मुकाबले 93.94 पर पहुंचा रुपया, 41 पैसे टूटा; तेल और विदेशी निकासी का दबाव

मिडिल ईस्ट तनाव, महंगे कच्चे तेल और शेयर बाजार गिरावट से रुपया कमजोर; RBI के हस्तक्षेप की उम्मीद

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डॉलर रुपया
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नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक दबाव और घरेलू बाजार की कमजोरी के बीच भारतीय रुपया लगातार गिरावट के दौर से गुजर रहा है। सोमवार (23 मार्च 2026) को शुरुआती कारोबार में रुपया 41 पैसे टूटकर डॉलर के मुकाबले 93.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 93.84 पर खुला और कुछ ही देर में गिरकर 93.94 तक पहुंच गया। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया 64 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 93.53 के स्तर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का सबसे निचला स्तर था।
गिरावट की प्रमुख वजहें
**1. मिडिल ईस्ट तनाव और महंगा कच्चा तेल**
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पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, उसे अब प्रति बैरल अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपया कमजोर हुआ है।
**2. विदेशी निवेशकों की निकासी**
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विदेशी संस्थागत निवेशक (FII/FPI) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ एक दिन में ही 5,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली हुई, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।
**3. घरेलू शेयर बाजार में गिरावट**
शेयर बाजार में भारी गिरावट का असर भी मुद्रा बाजार पर पड़ा। सोमवार को सेंसेक्स 1,300 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में भी करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई।
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**4. मजबूत डॉलर इंडेक्स**
डॉलर इंडेक्स 99.66 के आसपास बना हुआ है, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को दर्शाता है। मजबूत डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राएं, खासकर उभरते बाजारों की करेंसी, कमजोर होती हैं।
RBI की भूमिका पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) स्थिति को संभालने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि, तेल कंपनियों और विदेशी निवेशकों की डॉलर की उच्च मांग के कारण दबाव बना रह सकता है।
विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट
आरबीआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 7.052 अरब डॉलर घटकर 709.759 अरब डॉलर रह गया है, जो चिंता का संकेत माना जा रहा है।
आगे क्या?
विश्लेषकों के मुताबिक, जब तक
* कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती
* वैश्विक तनाव कम नहीं होता
* और विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं रुकती
तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
निवेशकों और आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारियों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
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