रुपया फिर रसातल में: डॉलर के मुकाबले 96.35 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद, क्या ₹100 पार जाएगी भारतीय करेंसी?
Rupee vs Dollar Record Low: ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने तोड़ी रुपये की कमर; एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनी, विशेषज्ञों ने दी ₹102 तक गिरने की चेतावनी
नई दिल्ली
वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के बाजार में लगी आग के बीच भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार, 18 मई को भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.4 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 96.35 के रिकॉर्ड निचले स्तर (All-Time Low) पर बंद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार की जा रही पैसे की निकासी ने रुपये पर चौतरफा दबाव बना दिया है।


ईरान युद्ध के बाद 5.5% टूटा रुपया, एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, इस साल भारतीय रुपया एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन चुका है। बीते 28 फरवरी को ईरान युद्ध की शुरुआत होने के बाद से अब तक भारतीय रुपये में 5.5 फीसदी से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
सोमवार को इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 96.19 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला था, लेकिन डॉलर की मजबूत मांग के चलते यह दिन के कारोबार में टूटकर 96.35 के ऐतिहासिक निचले स्तर को छू गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को रुपया 95.81 के स्तर पर बंद हुआ था।

क्यों रसातल में जा रहा है रुपया? जानिए मुख्य कारण:
-
ट्रंप की धमकी और कच्चे तेल में उबाल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर दिए गए कड़े बयान ("ईरान के पास समय कम है, तेजी से फैसला न लेने पर उसके पास कुछ नहीं बचेगा") के बाद अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.83 फीसदी उछलकर 111.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
-
विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। मार्च से लेकर अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 23.5 अरब डॉलर (करीब $23.5 Billion) से अधिक के शेयर बेच चुके हैं।
-
डॉलर इंडेक्स की मजबूती: छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स (Dollar Index) 0.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.32 के स्तर पर बना हुआ है, जिससे रुपया लगातार कमजोर पड़ रहा है।
क्या 100 या 102 के स्तर तक गिर जाएगी भारतीय करेंसी?
मुद्रा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अगर मौजूदा वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे तो रुपये में गिरावट का कोई परमानेंट बॉटम (तल) नजर नहीं आ रहा है। करेंसी एक्सपर्ट के.एन. डे के मुताबिक, लगातार बढ़ते चालू खाता घाटे (CAD) और भू-राजनीतिक संकट के कारण मनोवैज्ञानिक रूप से रुपया जल्द ही ₹100 प्रति डॉलर के स्तर को छू सकता है।

वहीं, आनंद राठी शेयर्स के डायरेक्टर नवीन माथुर ने चेतावनी दी है कि यदि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है और रिजर्व बैंक (RBI) तत्काल दखल नहीं देता है, तो आने वाले समय में रुपया डॉलर के मुकाबले 102 के स्तर तक भी लुढ़क सकता है। बोफा ग्लोबल रिसर्च (BofA Global Research) ने भी चालू वर्ष के अंत तक रुपये के 98 के स्तर तक गिरने का अनुमान लगाया है।
रुपये को बचाने के लिए क्या कर रही है सरकार और RBI?
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए है। अगर आरबीआई अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर बाजार में दखल नहीं देता, तो रुपये की यह गिरावट और भी ज्यादा भयावह हो सकती थी। इसके अलावा, सरकार ने देश के चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने और रुपये को सपोर्ट देने के लिए हाल ही में सोने और चांदी के आयात (Import Tax) पर टैक्स बढ़ा दिया है ताकि देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा को रोका जा सके।
