आर्थिक मोर्चे पर बड़ी गिरावट: डॉलर के मुकाबले 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला रुपया; सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा टूटा
क्यों गिर रहा है रुपया?, शेयर बाजार में भी हाहाकार
मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गुरुवार की सुबह एक बुरी खबर लेकर आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपया (INR) इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 32 पैसे टूटकर 95.20 के सर्वकालिक निचले स्तर तक लुढ़क गया।


क्यों गिर रहा है रुपया? 3 मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में इस बड़ी गिरावट के पीछे तीन प्रमुख वैश्विक कारण हैं:
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कच्चे तेल का उबाल: ब्रेंट क्रूड का दाम 122 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ गई है।
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पश्चिम एशिया में तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही पर लगी रोक ने निवेशकों में बेचैनी पैदा कर दी है।
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मजबूत डॉलर इंडेक्स: छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 98.96 पर पहुंच गया है, जिससे उभरते बाजारों की करेंसी पर दबाव है।
शेयर बाजार में भी हाहाकार
रुपये की कमजोरी का सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर भी दिखा। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 821.79 अंक टूटकर 76,674.57 पर आ गया, जबकि निफ्टी 287.3 अंक फिसलकर 23,890.35 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बुधवार को भी 2,468 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की थी, जिससे बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया है।

रुपये का अब तक का सफर: एक नजर में
रुपये की गिरावट का इतिहास बताता है कि वैश्विक संकटों ने हमेशा भारतीय करेंसी को चोट पहुंचाई है:
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1947: आजादी के समय $1 = ₹1 के करीब था।
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1991: भुगतान संतुलन संकट के समय दर ₹26 के पार गई।
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2022: पहली बार रुपया 80 के पार निकला।
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मार्च 2026: रुपया 90-93 के दायरे में रहने के बाद अब 95.20 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर है।
विशेषज्ञों की राय
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, "रुपये पर मुख्य दबाव तेल की बढ़ती कीमतों का है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच नाकाबंदी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में रुपये पर और दबाव देखा जा सकता है।"

आप पर क्या होगा असर?
रुपये के कमजोर होने से भारत में आयात होने वाली चीजें महंगी हो जाएंगी। इसमें इलेक्ट्रॉनिक सामान, मोबाइल, कच्चा तेल (पेट्रोल-डीजल) और विदेश में पढ़ाई महंगी होना तय है। साथ ही, महंगाई दर (Inflation) बढ़ने का भी खतरा पैदा हो गया है।
