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Indian Rupee Record Hike: US डॉलर के मुकाबले 2 महीने के हाई पर पहुंचा भारतीय रुपया

डॉलर के मुकाबले रुपया 94.27 के स्तर पर आया; रिजर्व बैंक की विशेष विदेशी मुद्रा योजना से देश में आया $136.37 अरब का रिकॉर्ड विदेशी फंड

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भदैनी मिरर (बिजनेस डेस्क): वैश्विक बाजार की उथल-पुथल के बीच भारतीय मुद्रा 'रुपये' ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शानदार वापसी की है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.74% मजबूत होकर 94.27 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह 29 जून 2026 के बाद से रुपये का सबसे मजबूत स्तर है।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू की गई विशेष फॉरेन करेंसी डिपॉजिट स्कीम और फॉरेक्स रिजर्व में आए भारी इनफ्लो (Foreign Fund Inflow) को रुपये की इस मजबूती का सबसे मुख्य कारण माना जा रहा है।

RBI की FCNR(B) स्कीम ने रचा इतिहास

रुपये को ऐतिहासिक दबाव से उबारने के लिए RBI ने 8 जून को 'फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट' यानी FCNR(B) योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत 31 अगस्त तक देश में 136.37 अरब डॉलर की विशाल विदेशी मुद्रा आई:

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  • FCNR(B) डिपॉजिट (NRI जमा): 127.2 अरब डॉलर

  • विदेशी मुद्रा उधारी (Overseas Foreign Currency Borrowing): 5.26 अरब डॉलर

  • एक्सटर्नल कमर्शियल बारोविंग (ECB): 3.89 अरब डॉलर

(नोट: शुरुआत में इस योजना से केवल 50-60 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अप्रवासी भारतीयों (NRIs) के जबरदस्त रिस्पॉन्स के कारण वास्तविक आंकड़ा 136 अरब डॉलर के पार निकल गया।)

रुपये में तेजी के 3 प्रमुख कारण

कोटक सिक्योरिटीज के FX एनालिस्ट के अनुसार, इस समय तीन बड़े कारक भारतीय रुपये को मजबूती प्रदान कर रहे हैं:

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  1. विशाल विदेशी मुद्रा भंडार: RBI की योजना से भारी मात्रा में डॉलर आए हैं, जिससे केंद्रीय बैंक की बाजार संभालने की क्षमता मजबूत हुई है।

  2. मजबूत GDP आंकड़े: भारत के हालिया जीडीपी आंकड़ों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

  3. बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी: देश के बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी की मौजूदगी से घरेलू आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल रहा है।

आगे कैसा रहेगा बाजार का रुख?

विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट में 94 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है। यदि रुपया 94 के नीचे लगातार बना रहता है, तो एक्सपोर्टर्स (निर्यातक) अपनी हेजिंग बढ़ा सकते हैं, जिससे रुपया और मजबूत होकर 92.50 प्रति डॉलर के स्तर तक भी पहुंच सकता है।

हालांकि FCNR(B) की नई जमा विंडो 31 अगस्त को बंद कर दी गई है, लेकिन RBI के साथ विदेशी मुद्रा स्वैप की सुविधा 11 सितंबर तक और ECB/OFCB सुविधाएं 31 दिसंबर तक जारी रहेंगी।