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ईरान युद्ध का असर: LPG के बाद अब पेट्रोल महंगा, HPCL ने प्रीमियम फ्यूल के दाम ₹2.09/L बढ़ाए

वैश्विक कच्चे तेल में उछाल का असर, ‘स्पीड’ और ‘पावर’ पेट्रोल हुआ महंगा; कई देशों में ईंधन कीमतों में भारी बढ़ोतरी

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नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। LPG के बाद अब पेट्रोल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी तेल कंपनी HPCL ने अपने प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट की कीमतों में ₹2.09 प्रति लीटर तक इजाफा कर दिया है।

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नई दरों के अनुसार, “स्पीड” और “पावर” पेट्रोल की कीमत 111.68 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 113.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है। हालांकि, सामान्य पेट्रोल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्यों बढ़े पेट्रोल के दाम?

अधिकारियों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, खासकर ईरान से जुड़े हालात, ने तेल उत्पादन और सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की वजह से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।

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LPG पहले ही हो चुका है महंगा

इससे पहले 7 मार्च को घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर में ₹115 की बढ़ोतरी की गई थी। यानी ईंधन के मोर्चे पर आम लोगों को लगातार झटके लग रहे हैं।

 दुनिया भर में बढ़े ईंधन के दाम

वैश्विक स्तर पर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है:

  • Pakistan: पेट्रोल 24.4% और डीजल 21.8% महंगा

  • China: पेट्रोल 10% और डीजल 10.9% बढ़ा

  • Sri Lanka: पेट्रोल 7.4%, डीजल 9.3% महंगा

  • Myanmar: पेट्रोल 7.2%, डीजल 8.5% बढ़ा

  • Afghanistan: पेट्रोल 7%, डीजल 8.8% महंगा

  • Bhutan: पेट्रोल 4.2%, डीजल 13.6% बढ़ा

वहीं Nepal और Bangladesh ने फिलहाल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।

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कई देशों में हालात और गंभीर

  • लाओस में डीजल 72.4% तक महंगा

  • वियतनाम में पेट्रोल 50% और डीजल 65.8% उछला

  • कंबोडिया में डीजल 37.3% बढ़ा

अफ्रीका और यूरोप भी इससे अछूते नहीं हैं:

  • नाइजीरिया में पेट्रोल 39.5% महंगा

  • जर्मनी और स्पेन में डीजल 25% से ज्यादा उछला

आम लोगों पर दोहरी मार

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर परिवहन और महंगाई पर पड़ता है। ऐसे में आने वाले समय में रोजमर्रा के सामान की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। ऐसे में आम लोगों को अपनी खर्च योजना में बदलाव करना पड़ सकता है

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