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HDFC Bank ने ग्राहकों को दिया झटका: होम, कार और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ीं; चेक करें नई EMI और लिस्ट

बढ़ जाएगी आपके लोन की EMI या अवधि

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बिजनेस डेस्क, भदैनी मिरर: यदि आपने देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है, तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। बैंक ने अपने ग्राहकों को तगड़ा झटका देते हुए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 10 बेसिस प्वाइंट (0.10%) तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। बैंक द्वारा जारी बयान के मुताबिक, ये नई दरें 8 जून 2026 से प्रभावी हो गई हैं।

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बढ़ जाएगी आपके लोन की EMI या अवधि

HDFC Bank के इस फैसले का सीधा असर उन पुराने ग्राहकों पर पड़ेगा जिनका लोन MCLR से लिंक्ड (जुड़ा) है। ब्याज दरें बढ़ने के कारण अब ग्राहकों की मासिक किस्त (EMI) महंगी हो सकती है, या फिर उनके लोन की भुगतान अवधि (Tenure) लंबी की जा सकती है।

नोट: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क (EBLR) से जुड़े नए लोन पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं पड़ेगा। बताते चलें कि पिछले महीने केनरा बैंक ने भी अपनी MCLR दरों में 5 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया था।

HDFC Bank की नई MCLR दरें: देखें पूरी लिस्ट

बैंक ने अलग-अलग अवधि (Tenure) के लिए दरों में 5 से 10 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है। 2 साल की अवधि वाले MCLR में सबसे ज्यादा 10 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई है:

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लोन की अवधि (Tenure) पुरानी दर नई दर (8 जून 2026 से प्रभावी)
ओवरनाइट (Overnight) 8.05% 8.10%
1 महीना (1 Month) 8.05% 8.05% (स्थिर)
3 महीने (3 Months) 8.15% 8.20%
6 महीने (6 Months) 8.30% 8.35%
1 साल (1 Year) (अधिकतर रिटेल लोन इसी से जुड़े हैं) 8.35% 8.40%
2 साल (2 Years) 8.45% 8.55%
3 साल (3 Years) 8.60% 8.65%

क्या होता है MCLR और यह क्यों जरूरी है?

MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) वह न्यूनतम ब्याज दर होती है जिसके नीचे कोई भी बैंक किसी भी ग्राहक को कर्ज नहीं दे सकता। यह बैंक की आंतरिक लागत पर निर्भर करता है। जब बैंक इसे बढ़ाते हैं, तो उससे जुड़े सभी फ्लोटिंग रेट लोन खुद-ब-खुद महंगे हो जाते हैं।

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RBI ने नहीं बदला रेपो रेट, फिर बैंकों ने क्यों बढ़ाई दरें?

हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत रेपो दर (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखा था। इसके बावजूद, बैंकों को अपनी फंडिंग लागत (जमाकर्ताओं को दिया जाने वाला ब्याज) और बाजार में लिक्विडिटी (नकदी) की स्थिति को संतुलित करने के लिए दरों में बदलाव करना पड़ता है। HDFC Bank का यह कदम दर्शाता है कि बैंकिंग सिस्टम में फंड जुटाने की लागत पर अभी भी दबाव बना हुआ है।

यू-टर्न: गौरतलब है कि इसी साल मार्च 2026 में HDFC Bank ने अपनी MCLR दरों में 10 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती कर ग्राहकों को राहत दी थी, लेकिन महज कुछ महीनों के भीतर बैंक ने दोबारा दरें बढ़ाकर कर्जदारों की चिंता बढ़ा दी है।