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आज तो गजब का सस्ता हुआ सोना-चांदी, क्या निवेश का सही मौका?

MCX पर सोना ₹1.57 लाख के नीचे फिसला, चांदी ₹2.60 लाख पर 

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 मजबूत डॉलर और अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के असर से कीमती धातुओं में गिरावट

नई दिल्ली। गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ने से बुलियन मार्केट पर दबाव बना हुआ है।

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एमसीएक्स पर अप्रैल फ्यूचर कांट्रैक्ट वाला सोना 0.47 फीसदी गिरकर 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि कारोबार के दौरान यह 1,57,701 रुपये के निचले स्तर तक फिसल गया। पिछला बंद भाव 1,58,755 रुपये था।

वहीं मार्च फ्यूचर कांट्रैक्ट वाली चांदी 0.63 फीसदी टूटकर 2,61,361 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली। कारोबार के दौरान चांदी 2,60,453 रुपये प्रति किलो तक लुढ़क गई, जो करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्शाता है। बाद में एमसीएक्स पर चांदी करीब 0.74 फीसदी कमजोर होकर 2,61,068 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव

वैश्विक स्तर पर भी सोने-चांदी में गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 0.4 फीसदी गिरकर 5,058.64 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स अप्रैल डिलीवरी के लिए 0.3 फीसदी फिसलकर 5,080 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
स्पॉट सिल्वर में 1.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 82.87 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।
अन्य कीमती धातुओं में स्पॉट प्लैटिनम 1 फीसदी गिरकर 2,110.63 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि पैलेडियम 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ 1,707.17 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता नजर आया।

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गिरावट की बड़ी वजहें

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में मजबूती और जनवरी के बेहतर रोजगार आंकड़ों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। अमेरिका में रोजगार सृजन उम्मीद से तेज रहा और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 फीसदी पर आ गई, जिससे फेड द्वारा जल्द ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर हुई है।
भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर स्पष्टता नहीं है, जबकि मध्य पूर्व की स्थिति पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

क्या खरीदारी का सही वक्त?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा गिरावट शॉर्ट टर्म में दबाव दिखा रही है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह “डिप पर खरीदारी” का मौका हो सकता है। हालांकि निवेश से पहले वैश्विक संकेतों और फेड की आगामी नीति बैठकों पर नजर रखना जरूरी है।