Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट, सोना ₹1500 से ज्यादा टूटा, चांदी भी ₹5000 हुई सस्ती; क्या और गिरेंगे दाम?
वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूती के बीच सोना सस्ता हुआ
वैश्विक बाजारों में मची हलचल का सीधा असर सर्राफा बाजार पर दिखने लगा है। सोमवार, 20 अप्रैल को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। हफ्ते के पहले ही दिन सोने का भाव ₹1500 से अधिक टूट गया, वहीं चांदी में ₹5000 प्रति किलो की बड़ी गिरावट आई है।


MCX पर आज क्या है सोने-चांदी का भाव?
सोमवार सुबह करीब 9:10 बजे MCX पर सोने की कीमतों में 1% की गिरावट देखी गई।
- सोना: ₹1,53,030 प्रति 10 ग्राम (पिछले सत्र के ₹1,54,609 से ₹1500 नीचे)।
- चांदी: ₹2,53,168 प्रति किलोग्राम (इसमें करीब ₹5000 की बड़ी गिरावट दर्ज की गई)।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड 0.4% गिरकर 4,809.71 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है।
क्यों आई कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) और आर्थिक कारण प्रमुख हैं:

1. अमेरिका-ईरान तनाव: विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले हफ्ते जिस युद्धविराम (Ceasefire) की उम्मीद में बाजार खुश था, वह अब टूटता नजर आ रहा है। संघर्ष की आशंका बढ़ने से अनिश्चितता बढ़ी है।
2. मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड: डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने के कारण सोना दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगा हो गया है। साथ ही अमेरिकी 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड पर यील्ड बढ़ने से निवेशकों का रुझान सोने से हटकर बॉन्ड की तरफ हुआ है।
3. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते शिपिंग बाधित हुई है, जिससे कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं और महंगाई की आशंका गहरा गई है।

विशेषज्ञ की राय: ओसीबीसी के रणनीतिकार क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, "फिलहाल सोने की दिशा पूरी तरह इस बात पर निर्भर है कि युद्धविराम वार्ता का अंतिम परिणाम क्या निकलता है। बाजार में फिलहाल जोखिम का माहौल है।"
क्या आगे भी जारी रहेगी गिरावट?
पिछले दो महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो फरवरी के अंत से अब तक सोने की कीमतें करीब 8% तक गिर चुकी हैं। आमतौर पर सोना महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने की मांग कम हो जाती है।
यदि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें बढ़ती हैं या युद्धविराम वार्ता विफल होती है, तो सोने की कीमतों में अस्थिरता का दौर जारी रह सकता है।
