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Gold-Silver Price Fall: ईरान-इजरायल युद्ध के बावजूद सोना-चांदी क्यों टूटे? जानिए बाजार की असली वजह
 

आमतौर पर युद्ध में बढ़ती हैं कीमती धातुओं की कीमतें, लेकिन इस बार मुनाफावसूली, मजबूत डॉलर और बाजार में नकदी की जरूरत से दबाव
 

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नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव के बावजूद सोमवार को वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर भू-राजनीतिक संकट या युद्ध की स्थिति में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना-चांदी की ओर रुख करते हैं, जिससे इनकी कीमतें बढ़ जाती हैं।

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लेकिन इस बार बाजार में उलटा रुख देखने को मिला है और कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।


कॉमेक्स पर सोना और चांदी फिसले

अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स (COMEX) पर सोने की कीमत करीब 1.3% गिरकर 5,090 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। वहीं, चांदी की कीमत में 4% से अधिक की तेज गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव गहराता जा रहा है और वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

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तेजी के बाद शुरू हुई मुनाफावसूली

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली (Profit Booking) है। पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में लगातार तेज बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में कई निवेशक अब अपने मुनाफे को भुनाने के लिए सोना बेच रहे हैं। इसके अलावा शेयर बाजारों में जारी भारी गिरावट के कारण निवेशक अपने पोर्टफोलियो में हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए भी सोना बेचकर नकदी जुटा रहे हैं। एमके वेल्थ मैनेजमेंट के शोध प्रमुख जोसेफ थॉमस के मुताबिक, फिलहाल मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिसका असर कीमती धातुओं पर भी पड़ रहा है।

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तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल

जहां सोना-चांदी दबाव में हैं, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।

  • ब्रेंट क्रूड 17% उछलकर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार
  • WTI क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल

तेल की कीमतों में यह तेजी होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण आई है।

तेल महंगा होने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला लेना मुश्किल हो सकता है।

मजबूत डॉलर ने बढ़ाया दबाव

कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट की एक और बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। बाजार में अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक नकदी के लिए अक्सर डॉलर की ओर रुख करते हैं। इससे डॉलर मजबूत होता है और सोना-चांदी की मांग पर दबाव पड़ता है।
इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से भी सोने की कीमतों पर असर पड़ता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें निवेशकों को दूसरे विकल्पों की ओर आकर्षित करती हैं।


क्या यह गिरावट लंबे समय तक रहेगी?

विश्लेषकों का मानना है कि सोने-चांदी की कीमतों में यह गिरावट किसी बड़े बुनियादी बदलाव का संकेत नहीं है। यह गिरावट फिलहाल युद्ध के कारण पैदा हुई अल्पकालिक अस्थिरता (Short-term Volatility) का परिणाम है। विशेषज्ञों का कहना है कि आगे चलकर सोने-चांदी की कीमतें फिर से अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक स्थिति जैसे पारंपरिक कारकों से तय होंगी।
 

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