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Gold Silver Price Crash: सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, सोना ₹3,200 और चांदी ₹4,200 टूटी

सोना फिसलकर ₹1.42 लाख और चांदी ₹1.86 लाख प्रति किलो पर पहुंची; दिसंबर 2025 के स्तर के करीब पहुंचे दाम

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भदैनी मिरर बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। सोना और चांदी खरीदने की प्लानिंग कर रहे ग्राहकों के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है, लेकिन निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। कीमती धातुओं के बाजार में गिरावट का दौर लगातार जारी है और नवंबर की शुरुआत भी निवेशकों के लिए निराशाजनक रही है। 1 नवंबर 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में एक ही झटके में सोना ₹3,200 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹4,200 प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई है।

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इस भारी गिरावट के बाद दोनों कीमती धातुओं के भाव सीधे दिसंबर 2025 के स्तर के करीब पहुंच गए हैं। इस साल रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब सोने-चांदी की चमक फीकी पड़ती नजर आ रही है।

सोना ₹1.42 लाख और चांदी ₹1.86 लाख पर फिसली

  • सोने का नया भाव: देश में 99.9% शुद्धता वाले सोने की कीमत गिरकर ₹1,42,000 प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) पर आ गई है। इससे पहले शुक्रवार को यह ₹1,45,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। गौर करने वाली बात है कि 26 दिसंबर 2025 को सोना इसी के आस-पास यानी ₹1,42,300 प्रति 10 ग्राम पर था।

  • चांदी का नया भाव: चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है। एक दिन की मंदी के बाद चांदी का भाव घटकर ₹1,86,000 प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गया है, जबकि इससे पहले यह ₹1,90,200 पर थी।

कीमतों में भारी गिरावट की 5 बड़ी वजहें

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी में आई इस तेज बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और आर्थिक कारक एक साथ काम कर रहे हैं:

  1. अमेरिकी महंगाई के आंकड़े: अमेरिका में उम्मीद से ज्यादा महंगाई के आंकड़े आने के बाद यह आशंका बढ़ गई है कि फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ब्याज दरों में कटौती करने में जल्दबाजी नहीं करेगा। लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रहने से सोने की मांग पर दबाव बढ़ा है।

  2. दिसंबर में Fed दरों को लेकर अनिश्चितता: निवेशकों को डर है कि दिसंबर में Fed ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। इससे नॉन-यील्डिंग एसेट (जिससे नियमित ब्याज न मिले) के तौर पर सोने का आकर्षण कम हुआ है।

  3. डॉलर और बॉन्ड यील्ड की मजबूती: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशकों का रुझान सोने से हटकर बॉन्ड की तरफ शिफ्ट हो रहा है।

  4. कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव: ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता ने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता को और बढ़ा दिया है, जिसका असर कीमती धातुओं पर पड़ा है।

  5. चांदी की औद्योगिक मांग पर असर: चांदी का इस्तेमाल केवल आभूषणों या निवेश के लिए नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर सेक्टर जैसे उद्योगों में भी होता है। इंडस्ट्रियल डिमांड को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण चांदी में सोने से भी ज्यादा बिकवाली देखने को मिल रही है।

क्या आगे और गिरेंगे दाम या आएगी तेजी?

विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर के महीने में सोने-चांदी की कीमतें किसी एक दिशा में भागने के बजाय सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं। डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

क्या अभी खरीदारी का सही समय है?

कीमतें कम होने के बाद निवेशकों के लिए यह एंट्री का मौका हो सकता है, लेकिन बाजार की अनिश्चितता को देखते हुए एकसाथ बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। यदि आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही फैसला लें।