Gold Rate Crash: सोना ₹7000 से ज्यादा सस्ता, चांदी ₹13,000 तक टूटी; जानिए गिरावट की बड़ी वजहें
मिडिल ईस्ट तनाव और ऊंची ब्याज दरों के संकेत से कीमती धातुओं में भारी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी अनिश्चितता
Mar 23, 2026, 11:01 IST
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नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर इस बार दबाव साफ दिखाई दे रहा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 3.8% तक गिरकर 4,320 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जो पिछले साल के स्तर के आसपास है। लगातार आठ सत्रों से जारी गिरावट ने बाजार को चौंका दिया है और इसे कई दशकों की बड़ी गिरावटों में गिना जा रहा है।


घरेलू बाजार में क्या है हाल
भारतीय कमोडिटी बाजार में भी इसका सीधा असर देखने को मिला।
एमसीएक्स (MCX) पर सोने की कीमत करीब 7,115 रुपये टूटकर 1,37,377 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई। वहीं चांदी में और बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जहां कीमत 13,606 रुपये फिसलकर 2,13,166 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई।

सिंगापुर बाजार में स्पॉट गोल्ड 3.3% गिरकर 4,343 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी भी 3.4% की गिरावट के साथ 65.61 डॉलर पर पहुंच गई। अन्य कीमती धातुएं जैसे प्लैटिनम और पैलेडियम भी दबाव में रहीं।
गिरावट की बड़ी वजहें
सोने-चांदी में इस तेज गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण माने जा रहे हैं—

* **ऊंची ब्याज दरों का दबाव:**
अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत कई केंद्रीय बैंकों ने संकेत दिए हैं कि ब्याज दरों में कटौती जल्द नहीं होगी। इससे सोने की मांग पर असर पड़ता है क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता।
* **महंगाई और तेल कीमतें:**
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ा है और बाजार में दबाव बना है।
* **मजबूरी में बिकवाली (Forced Selling):**
शेयर बाजार और अन्य निवेश साधनों में नुकसान के चलते निवेशक घाटा पूरा करने के लिए सोना बेच रहे हैं, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
* **भू-राजनीतिक तनाव:**
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
क्या अब आएगा उछाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद सोना “ओवरसोल्ड” जोन में पहुंच चुका है। 14-दिवसीय RSI इंडिकेटर 30 से नीचे जाने को आमतौर पर ज्यादा बिकवाली का संकेत माना जाता है। ऐसे में अल्पावधि में कीमतों में हल्का सुधार संभव है, लेकिन यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
* शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है
* लंबी अवधि के निवेशक गिरावट का फायदा उठाकर धीरे-धीरे खरीदारी कर सकते हैं
* वैश्विक घटनाक्रम और ब्याज दरों के संकेतों पर नजर बनाए रखना जरूरी है
कुल मिलाकर, सोने-चांदी की कीमतों में आई यह बड़ी गिरावट निवेशकों के लिए जहां चिंता का कारण है, वहीं लंबी अवधि में इसे अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।
