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Gold Price: युद्ध के बावजूद क्यों नहीं बढ़ रहे सोने के दाम? जानिए कीमतों में सुस्ती की बड़ी वजह

क्रूड ऑयल महंगा और डॉलर मजबूत होने से गोल्ड सीमित दायरे में; एक्सपर्ट्स बोले—साल के अंत तक 15-20% उछाल भी संभव

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नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर युद्ध और तनाव की स्थिति के बावजूद सोने की कीमतों में अपेक्षित तेजी नहीं देखी जा रही है। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार कीमतें सीमित दायरे में ही बनी हुई हैं।

हाल के दिनों में सर्राफा बाजार में सोने के भाव में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार कई आर्थिक कारकों के कारण सोना फिलहाल स्थिर दायरे में ट्रेड कर रहा है।

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मामूली उतार-चढ़ाव

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार शाम को सर्राफा बाजार में सोने का भाव लगभग 1,58,399 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं 27 फरवरी को इसका भाव करीब 1,59,097 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

इससे साफ है कि पिछले कुछ दिनों में सोने के भाव में बहुत ज्यादा तेजी नहीं आई है और कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं।

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सीमित दायरे में ट्रेड कर रहा गोल्ड

विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 300 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रहा है। वहीं भारतीय वायदा बाजार Multi Commodity Exchange of India Ltd. में भी सोना लगभग 10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की रेंज में ट्रेड कर रहा है।

क्रूड ऑयल और डॉलर का असर

विश्लेषकों का कहना है कि सोने की कीमतों पर कई वैश्विक कारक असर डाल रहे हैं।

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दुनिया के प्रमुख तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz से जुड़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है।

इस बीच West Texas Intermediate क्रूड ऑयल की कीमत करीब 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

तेल की बढ़ती कीमतों से वैश्विक महंगाई का खतरा बढ़ा है। ऐसे माहौल में कई निवेशक सोने की बजाय डॉलर को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चुन रहे हैं। डॉलर के मजबूत होने से भी सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

आगे क्या हो सकता है रुझान

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों का भविष्य काफी हद तक वैश्विक आर्थिक हालात और निवेशकों की भावना पर निर्भर करेगा।

यदि बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है तो सोने की कीमतें 5 से 20 प्रतिशत तक गिर सकती हैं। दूसरी ओर, अगर वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो सोने में तेजी देखने को मिल सकती है।

कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि ऐसी स्थिति में इस साल के अंत तक सोने का भाव मौजूदा स्तर से 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है

⚠️ नोट: यह खबर केवल बाजार विश्लेषण पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। निवेश से पहले विशेषज्ञों से सलाह लेना जरूरी है।