Movie prime
PMC_Hospital

EPFO New Rules: पीएफ में अब 1800 रुपये से अधिक का योगदान होगा स्वैच्छिक, EPFO ने बदले कई बड़े नियम; देखें पूरी डिटेल

बेसिक सैलरी चाहे जितनी हो, अनिवार्य पीएफ योगदान के तौर पर केवल 1,800 रुपये ही कटेंगे।

Ad

 
EPFO
WhatsApp Group Join Now

Ad

पैसे निकालने की कैटेगरीज को 13 से घटाकर सिर्फ 3 किया गया, अब 100% तक एडवांस निकालने की मंजूरी

ठेका कर्मचारियों (Contract Workers) के पीएफ योगदान की जिम्मेदारी अब मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) की होगी

नई दिल्ली/बिजनेस डेस्क: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरीपेशा कर्मचारियों को बड़ी राहत और वित्तीय आजादी देते हुए प्रोविडेंट फंड (PF) के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। 'एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड्स स्कीम, 2026' के नए प्रावधानों के तहत अब पीएफ खाते में एक निश्चित सीमा से अधिक का योगदान पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) कर दिया गया है।

Ad
Ad

नए नियमों के अनुसार, वर्तमान कानूनी वेतन सीमा (15,000 रुपये प्रति माह) तक 12% का योगदान देना ही अनिवार्य होगा। इसका मतलब यह है कि भले ही आपकी बेसिक सैलरी 1 लाख रुपये प्रति माह क्यों न हो, आपके पीएफ योगदान के तौर पर अनिवार्य रूप से केवल 1,800 रुपये ही काटे जाएंगे, और नियोक्ता (Employer) भी उतना ही हिस्सा देगा। इससे अधिक का कोई भी योगदान अब कर्मचारी की इच्छा पर निर्भर करेगा।

Ad

कर्मचारियों और नियोक्ताओं को मिली बड़ी आजादी 

नए नियमों के तहत यदि कोई कर्मचारी अपनी कानूनी वेतन सीमा से अधिक वेतन पर अतिरिक्त योगदान देना चाहता है, तो वह स्वैच्छिक आधार पर इसे चुन सकता है।

  • नियोक्ता के लिए छूट: कर्मचारी के इस अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान के बराबर योगदान देना नियोक्ता के लिए अनिवार्य नहीं होगा, यह उनकी इच्छा पर निर्भर है।

  • लचीलापन: कर्मचारी और नियोक्ता दोनों ही किसी भी समय इस अतिरिक्त स्वैच्छिक योगदान को कम या पूरी तरह बंद करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

  • सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव: चूंकि निजी क्षेत्र में ज्यादातर कंपनियों में 'कॉस्ट-टू-कंपनी' (CTC) मॉडल होता है, इसलिए इस नियम के बाद कंपनियां और कर्मचारी मिलकर एक नया सैलरी स्ट्रक्चर तैयार कर सकते हैं, जिससे कर्मचारियों के हाथ में आने वाली सैलरी (Take-home Salary) बढ़ सकती है।

पैसे निकालने की प्रक्रिया हुई बेहद आसान

EPFO ने सदस्यों की सहूलियत के लिए पीएफ से एडवांस पैसे निकालने (PF Withdrawal) की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। पहले जहां इसके लिए 13 अलग-अलग कैटेगरीज थीं, उन्हें घटाकर अब सिर्फ 3 कर दिया गया है:

Ad
  1. जरूरी आवश्यकताएं: बीमारी, उच्च शिक्षा और शादी ब्याह।

  2. आवास संबंधी जरूरतें: घर खरीदना या निर्माण।

  3. विशेष परिस्थितियां।

इसके साथ ही, अब सदस्य अपने 'एलिजिबल बैलेंस' (कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का हिस्सा मिलाकर) का 100% तक एडवांस निकाल सकते हैं। हालांकि, इसके लिए एक शर्त रखी गई है कि सदस्यों को अपने अकाउंट में कुल कॉन्ट्रिब्यूशन का कम से कम 25% हिस्सा 'मिनिमम बैलेंस' के रूप में बनाए रखना होगा।

ठेका कर्मचारियों और कम्प्लायंस को लेकर सख्त नियम

प्रिंसिपल एम्प्लॉयर की बढ़ी जिम्मेदारी नई स्कीम में कॉन्ट्रैक्ट (ठेके) पर काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए 'प्रिंसिपल एम्प्लॉयर' (मुख्य नियोक्ता) की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है। यदि ठेकेदार (Contractor) अलग से रजिस्टर्ड नहीं है, तो उसके जरिए रखे गए कर्मचारियों के पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन का भुगतान सुनिश्चित करने की पूरी जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी।

15 दिनों के भीतर फाइल करना होगा कंबाइंड रिटर्न

कम्प्लायंस और फाइलिंग से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है। अब सभी नियोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे नई स्कीम लागू होने के 15 दिनों के भीतर 'फॉर्म V' में एक कंबाइंड रिटर्न फाइल करें। इस रिटर्न में सभी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण जानकारियां जैसे—यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN), पैन (PAN), ग्रॉस वेज, ईपीएफ वेज और अन्य आवश्यक पहचान विवरण देना अनिवार्य होगा।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की सहमति से तैयार किए गए ये नए नियम नए लेबर कोड्स के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं, जिससे पीएफ सब्सक्राइबर्स को अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स को लेकर अधिक स्वतंत्रता मिल सकेगी।